ब्रिटेन-ऑस्ट्रेलिया ने किया बड़ा ऐलान, ईरान ने मारी अमेजॉन पर मिसाइल, जंग पर बड़ा अपडेट
अमेरिका का अगला कदम क्या, क्यूबा से पहले NATO पर एक्शन, पुतिन की भाषा क्यों बोल रहे ट्रंप ?
ईरान-इजरायल जंग के बीच क्या दुनिया में कुछ और बड़ा होने वाला है....पहले ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं, फिर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री मीड़िया के सामने आते हैं, उसके बाद ट्रंप के संबोधन की बात आती है...इसी बीच दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बैक टू बैक दो मीटिंग करते हैं...
पहली मीटिंग होती है, CCS यानि कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की. जिसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे...
जबकि दूसरी मीटिंग होती है, CCEA यानि आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति की, जिसमें इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा भी शामिल होने पहुंचते हैं.
इन दोनों मीटिंग में इस बात पर चर्चा होती है कि अगर हालात बिगड़े तो वहां फंसे भारतीयों को कैसे निकालना हो, जंग को एक महीना बीत चुका है, ऐसे में भारत पर इसका संभावित असर कैसे कम किया जाए, इसे लेकर भी बातचीत होती है. क्योंकि जंग की वजह से लगातार कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतें जहां बढ़ रही हैं तो वहीं रसोई गैस की किल्लत की ख़बरें भी कई जगहों से आ रही हैं...प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें बढ़ने की भी ख़बरें हैं. आने वाले दिनों में दुनियाभर में हालत और बिगड़ने की आशंका है...क्योंकि ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज मीडिया के सामने आकर कहते हैं. आने वाला समय आसान नहीं होगा, देश में नेशनल फ्यूल सिक्योरिटी प्लान लागू किया गया है..
उसके बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपने देश की जनता को संबोधित करते हैं, और कहते हैं, तूफ़ान चाहे कितना भी ज़ोरदार क्यों न हो, हम इसका सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. ये हमारी जंग नहीं है, इसलिए हम इसमें शामिल नहीं होंगे.
इसके बाद आती है बारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की, जो ईरान को ये बताने में लगे हैं कि अमेरिका ने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया है, होर्मुज खुले या न खुले, हम जंग खत्म करने की तैयारी में हैं...जिसके बाद सवाल उठ रहा है अब नेतन्याहू का क्या होगा....ईरान ने तो इजरायल को नक्शे से मिटाने की कसम खाई है, उसने अपनी चेतावनी के बाद बहरीन में अमेजॉन ऑफिस पर हमला भी किया है, जहां भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है, और बहरीन के रक्षा मंत्रालय ने बकायदा इसकी पुष्टि भी की है, तो क्या तेल वाली लड़ाई अब डेटा सेंटर और इंटरनेट तक पहुंच चुकी है...
क्या ट्रंप की एक सनक से दुनिया को अभी और नुकसान होना बाकी है...क्योकि अमेजॉन जैसी कंपनियों को नुकसान पहुंचने का मतलब है दुनिया की सप्लाई चेन से लेकर रोजगार तक पर बड़ा असर पड़ना...आपके घर पहुंचने वाला ऑनलाइन डिलीवरी वाला सामान भी लेट हो सकता है...
अगर आप यूरोप से लेकर एशिया तक के कई देशों की हालत देखें तो वहां महंगाई बढ़ने की वजह से किसान, ट्रक ड्राइवर, छोटे कारोबारी और आम परिवार इस समय आर्थिक दबाव झेल रहे हैं. पाकिस्तान से लेकर बांग्लादेश तक में पेट्रोल-डीजल से लेकर रोजमर्रा के सामान की कीमतें आसमान छू रही हैं...एक्सपर्ट का मानना है कि युद्ध के कारण पैदा हुए आर्थिक झटके आने वाले कई महीनों तक बने रह सकते हैं. यही वजह है कि दुनियाभर के देश इस जंग में सीधे तौर पर न शामिल होकर भी परेशान हैं...खाड़ी मुल्कों के वो देश जो अमेरिका और ईरान के बीच फंसे हुए हैं, उनकी हालत सबसे ज्यादा खस्ता है, और वहां रहने वाले भारतीय जो फंसे हुए हैं, उनकी सुरक्षा को लेकर भी भारत सरकार लगातार मीटिंग कर रही है, ईरान के विदेश मंत्री से खुद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर बातचीत कर रहे हैं....ताकि भारत पर इस जंग के असर को कम किया जाए...