नई दिल्ली: मुंबई के खौफनाक 26/11 आतंकी हादसे को गुजरे 17 साल हो चुके हैं, लेकिन अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने एक टीवी चैनल को दिए साक्षात्कार में एक महत्वपूर्ण राज खोला है. उन्होंने स्वीकार किया कि यूपीए शासनकाल में वैश्विक दबाव, विशेष रूप से अमेरिका की ओर से मिली चेतावनी के चलते, पाकिस्तान पर कोई सैन्य हमला करने का निर्णय नहीं लिया गया.
चिदंबरम ने बताया कि उनके दिमाग में प्रतिशोध की योजना जरूर कौंधी थी, लेकिन अंततः सरकार ने इस रास्ते को त्याग दिया. साक्षात्कार के दौरान चिदंबरम ने घटना के तुरंत बाद की परिस्थितियों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि दुनिया भर से प्रतिनिधि दिल्ली पहुंचे और हमें युद्ध की हामी न भरने की सलाह देते रहे. विशेष रूप से, हमलों के दो-तीन दिन बाद अमेरिकी विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस ने प्रधानमंत्री और उनसे मुलाकात की.
राइस ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कृपया कोई प्रतिक्रिया न दें. चिदंबरम ने जवाब दिया कि यह पूर्ण रूप से सरकार का निर्णय होगा. उन्होंने यह भी माना कि बिना गोपनीय जानकारी उजागर किए, वे स्वीकार करते हैं कि प्रतिशोध का ख्याल उनके मन में आया था. चिदंबरम ने आगे खुलासा किया कि हमले के बाद मंत्रिमंडल स्तर पर इस विषय पर विस्तृत बहस हुई. उन्होंने प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख अधिकारियों के साथ संभावित कदमों पर विचार किया, यहां तक कि संकट के दौरान भी यह चर्चा जारी रही. हालांकि, विदेश मंत्रालय और भारतीय विदेश सेवा के सुझावों के प्रभाव में, सैन्य विकल्प को खारिज कर दिया गया.
याद रहे कि 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तान आधारित 10 हमलावरों ने मुंबई को निशाना बनाया. उन्होंने प्रमुख स्थलों जैसे छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताज होटल, ओबेरॉय, लियोपोल्ड कैफे, कामा अस्पताल और नरीमन हाउस पर धावा बोला. तीन दिनों तक चले इस कांड में 166 निर्दोषों की जान गई, जिनमें कई विदेशी भी थे. सुरक्षाबलों ने नौ हमलावरों को ढेर कर दिया, जबकि बचा हुआ अजमल कसाब को 2012 में सजा-ए-मौत दी गई.
इस विफलता की जिम्मेदारी लेते हुए तत्कालीन गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने त्यागपत्र दे दिया, जिसके बाद चिदंबरम को वित्त विभाग से हटाकर आंतरिक सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया. चिदंबरम ने कबूल किया कि वे इस तबादले से संतुष्ट नहीं थे.
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने फोन पर सूचित किया कि यह सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह का संयुक्त निर्णय था. मैं वित्त मंत्रालय नहीं छोड़ना चाहता था, क्योंकि मैंने पांच बजट पेश किए थे और चुनाव नजदीक थे. चिदंबरम के इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया जताई. केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने टिप्पणी की कि राष्ट्र को पहले से पता था कि 26/11 का प्रबंधन बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप से प्रभावित हुआ था.