नई दिल्ली: बिहार के दरभंगा का एक नाबालिग लड़का, जिसे पहले मृत घोषित कर उसका अंतिम संस्कार किया गया था, 70 दिन बाद सुरक्षित घर लौट आया है. लड़का 8 फरवरी को लापता हो गया था. परिवार ने स्थानीय पुलिस स्टेशन में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज की. कुछ दिनों बाद, उन्हें 45,000 रुपए की फिरौती के लिए फोन आया और उन्होंने 5,000 रुपए ट्रांसफर भी किए.
करा दिया था अंतिम संस्कार
28 फरवरी को रेलवे ट्रैक पर एक गंभीर रूप से घायल लड़का मिला, जिसे अस्पताल ले जाया गया. 1 मार्च को उसकी मौत हो गई. परिवार को शव की पहचान के लिए बुलाया गया. उन्होंने शव पर संदेह जताया और डीएनए टेस्ट की मांग की, लेकिन उनका दावा है कि पुलिस ने उन पर दबाव डाला कि वह शव उनके बेटे का ही है. शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया, और कल्याण विभाग ने परिवार को 4 लाख रुपए का मुआवजा दिया.
स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस घटना ने दरभंगा में भारी आक्रोश पैदा किया. स्थानीय लोगों ने शव के साथ प्रदर्शन किया और पुलिस के साथ झड़प भी हुई. संबंधित पुलिस स्टेशन के तत्कालीन SHO को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया गया. लड़का जीवित मिला और दरभंगा सिविल कोर्ट में अपने वकील के साथ पेश हुआ. उसने बताया कि अज्ञात लोगों ने उसका अपहरण किया, उसका मुंह ढककर उसे जबरदस्ती ले गए. बाद में वह खुद को नेपाल में पाया. एक दिन, जब अपहरणकर्ताओं ने गलती से दरवाजा खुला छोड़ दिया, तो वह भाग निकला और स्थानीय लोगों की मदद से अपने परिवार से संपर्क किया.
परिवार ने दी प्रतिक्रिया
वीडियो कॉल के जरिए लड़के की पहचान करने के बाद परिवार उसे घर ले आया. लड़के के भाई ने बताया कि उस समय परिवार भावनात्मक रूप से टूट चुका था और रात में शव की पहचान की थी. उन्होंने वकील के बयान का समर्थन किया कि पुलिस ने डीएनए टेस्ट की मांग को नजरअंदाज कर शव स्वीकार करने का दबाव डाला.
पुलिस ने कर दी पुष्टि
लड़के की सुरक्षित वापसी के बाद परिवार ने अधिकारियों को सूचित किया और मुआवजे की राशि लौटाने की इच्छा जताई. जिस लड़के का अंतिम संस्कार हुआ, उसकी पहचान अभी तक नहीं हो सकी. अपहरण और गलत पहचान के मामले की जांच चल रही है. पुलिस ने पुष्टि की कि लड़का लौट आया है और मामले की तह तक जाने के लिए जांच जारी है.