स्वाति मालीवाल की मेडिकल रिपोर्ट में ऐसा क्या है, जिसे देखते ही दिल्ली पुलिस के अधिकारी तुरंत हथकड़ी लेकर सीएम आवास पहुंच गए. वहां केजरीवाल के पीछे छिपे विभव कुमार को खींचकर बाहर निकाला. गाड़ी में बैठाई और तुरंत लेकर निकल गई. अब विभव कुमार के जरिए दिल्ली पुलिस केजरीवाल के वो राज खोलने वाली है, जो बरसों से सामने नहीं आ पाए हैं.
वहीं लेकिन इधर दिल्ली पुलिस तैयारी में लगी है, तो दूसरी तरफ स्वाति मालीवाल को झूठा साबित करने के लिए केजरीवाल की पार्टी करोड़ों रुपये खर्च करने को तैयार बैठी है. एक महिला को न्याय न मिले इसके लिए केजरीवाल किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं. आम आदमी पार्टी के समर्थक लिख रहे हैं, न उसके कपड़े फटे हैं,. न चलने में कोई दिक्कत है, एक महिला सुरक्षाकर्मी स्वाति का हाथ पकड़े हुए है, तीन अन्य सुरक्षाकर्मी स्वाति के साथ चल रहे हैं.
इस दौरान दो पुलिसकर्मी भी वहां दिखते हैं, सड़क पर पहुंचते ही स्वाति सीएम हाउस की ओर इशारा करते हुए कुछ कहती हैं, इसी वीडियो के आधार पर AAP ने ये दावा किया कि स्वाति के साथ कुछ गलत नहीं हुआ. जबकि स्वाति मालीवाल की मेडिकल रिपोर्ट चीख-चीखकर कह रही है कि स्वाति के साथ गलत हुआ है.
स्वाति मालीवाल की मेडिकल रिपोर्ट में AIIMS ने साफ-साफ लिखा है कि स्वाति के चेहरे और हाथ पर चोट के निशान मिले हैं. तो सवाल उठता है कि क्या सिर्फ छूने भर से चोट के निशान भर आए. क्या महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली स्वाति के हाथ इतने कमजोर हैं कि केजरीवाल के बाउंसर ने हाथ पकड़कर बाहर निकाला इसलिए हाथ पर चोट आ गई. अगर AAP वालों का दावा यही है तो फिर चेहरे पर चोट के निशान कहां से आए.
दावा ये किया जा रहा है कि केजरीवाल पर एक वकील का दबाव है ये वही वकील हैं, जिन्होंने बेल के लिए केजरीवाल की पैरवी की है. उनकी एक सुनवाई की फीस 26 लाख से 30 लाख की फीस है. इस हिसाब से करोड़ों रुपये केजरीवाल को इन्हें देने पड़ सकते हैं. मतलब पैसे व्हाइट मनी के तौर पर देने पड़ेंगे, इसीलिए एक डील हुई कि वकील साहब को राज्यसभा की कुर्सी दी जाए, पर स्वाति मालीवाल ने सारा खेल इस्तीफा न देकर बिगाड़ दिया.
यहीं से केजरीवाल की करीबी केजरीवाल की सबसे बड़ी दुश्मन बन गई और उसने भी ठान लिया कि उसके साथ गलत हुआ तो वो सरजी की सच्चाई बाहर आकर रहेगी. पर केजरीवाल के साथ वाले भी इतने कच्चे नहीं हैं कि इन आरोपों से वो पीछे हट जाएं, बल्कि हाथों में कागज लेकर घूमने वाले हर बात पर सबूत-सबूत चिल्लाने वाले केजरीवाल की पार्टी इस बार नया गेम कर रही है, जिसे समझना होगा.
आम आदमी पार्टी लगातार वीडियो जारी कर रही है और खुद से ही ये कह रही है कि मैं सच्चाई बताता हूं. स्वाति जो कह रही है वो सच नहीं है, पर दूसरे नजरिए से सोचिए आप ऐसा करके खुद ही फंसने वाली है, क्योंकि ये सारे वीडियो अधूरे हैं. सोशल मीडिया में जारी वीडियो में स्वाति मालीवाल चिल्लाती हुई कहती हैं, नौकरी खा जाऊंगी, मुझे हाथ लगाया तो ठीक नहीं होगा, ये साफ बता रहा है कि स्वाति को इस बात का अंदाजा था कि ये लोग कुछ भी कर सकते हैं.
इसिलिए वो अंदर से ही दिल्ली पुलिस को फोन मिलाती हैं पर मदद नहीं मिल पाती. उसी घर से उन्हें धक्का मारकर बाहर निकाल दिया जाता है, जिस घर में उनकी एंट्री आधी रात को कोई कभी नहीं रोक सकता था. आज स्वाति मालीवाल न्याय मांग रही हैं, पर केजरीवाल की पार्टी राजनीति करने में लगी है.
यहां तक कि केजरीवाल की करीबी आतिशी ये तक कह देती हैं कि स्वाति मालीवाल के खिलाफ ACB में एक केस चल रहा है, और इसी केस में राहत के लिए वो बीजेपी के इशारे पर ये सबकुछ कर रही हैं.
पर सवाल है कि स्वाति के आरोप अगर झूठे हैं तो फिर बिभव कुमार को केजरीवाल सरेंडर के लिए क्यों नहीं कहते, ताकि सबकुछ दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए, अगर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर भी हमारे देश के नेता राजनीति करेंगे तो देश का क्या होगा, क्या इस केस में दिल्ली पुलिस भी कछुए की चाल चल रही है, लोग तो यही कह रहे हैं कि अगर ये मामला यूपी का होता तो योगी की पुलिस अब तक बिभव कुमार से अपनी भाषा में निपट चुकी होती.
इतना हंगामा ही नहीं होता, अगर बिभव ने यूपी में जाने की गलती की तो फिर यूपी पुलिस उन्हें अपनी जिप्सी में बिठाकर थाने पहुंचा सकती है और फिर क्या होगा ये कोई नहीं कह सकता. जो वीडियो एक-एक करके जारी हो रहे हैं और जो सबूत सामने आ रहे हैं, वो साफ इशारा कर रहे हैं कि बिभव कुमार के जेल जाते ही केजरीवाल की वो कुंडली खुलने वाली है, जिसके बाद जेल से बाहर आना केजरीवाल के लिए एक सपने की तरह हो जाएगा.