मुजफ्फरनगर का नाम होगा लक्ष्मीनगर, कौन थे मुजफ्फर खान जिनके नाम पर बना मुजफ्फरनगर

Abhishek Chaturvedi 05 Mar 2025 04:05: PM 3 Mins
मुजफ्फरनगर का नाम होगा लक्ष्मीनगर, कौन थे मुजफ्फर खान जिनके नाम पर बना मुजफ्फरनगर
  • मुजफ्फरनगर का नाम होगा लक्ष्मीनगर, बीजेपी विधायक ने उठाई मांग, डिप्टी सीएम ने कर दिया बड़ा इशारा!
  • जहां है शुक्रताल जैसे तीर्थ,जहां परीक्षित ने लिया भगवद्पुराण का ज्ञान, वो सरवट नगर कैसे बना मुजफ्फरनगर?
  • माता लक्ष्मी से क्या है मुजफ्फरनगर का नाता, RSS का सपना योगी करेंगे पूरा, मोहन भागवत देंगे बड़ा गिफ्ट!

नई दिल्ली: सहारनपुर और मेरठ शहर के बीच बसा मुजफ्फरनगर, क्या संभल की तरह ही कोई बड़ा सच छिपाए बैठा है, क्या संभल के बाद इस शहर में भी कुछ बड़ा होने वाला है, जिस मुजफ्फरनगर का नाम आरएसएस अपने कार्यक्रम में लक्ष्मीनगर लिखता है, क्या उस शहर का नाम योगी आदित्यनाथ अब लक्ष्मीनगर करने जा रहे हैं, बीजेपी एमएलसी ने शहर का नाम ब दलने की मांग उठाकर कई गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है, साथ ही लोग ये भी गूगल पर सर्च करने लगे हैं कि इस शहर का पौराणिक इतिहास क्या है, तो ऐतिहासिक तथ्यों पऱ आएं, उससे पहले वर्तमान तस्वीरें देख लीजिए, ये हैं यूपी बीजेपी के उपाध्यक्ष और बीजेपी के MLC मोहित बेनीवाल, जो 4 मार्च को यूपी विधानपरिषद में मुजफ्फरनगर का नाम बदलने की मांग उठाते हैं.

इनका दावा है मुजफ्फरनगर अपने गुड़ की मिठास के लिए भी प्रसिद्ध है, गन्ना की खेती के लिए मशहूर है, इसलिए आर्थिक संपन्नता की प्रतीक मां लक्ष्मी के नाम पर शहर का नाम होना चाहिए, जिसे लेकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कहते हैं सबको अपनी बात रखने का हक है. जबकि शिवपाल यादव कहते हैं बीजेपी वाले सदन में मेरा नाम बदल दे रहे हैं, हमेशा चच्चु-चच्चु कहते रहते हैं, ये लोग केवल नाम बदलते हैं.

सियासत से हटकर इतिहास को देखें तो तीन तरह की कहानियां मिलती है, पहली कहानी मुजफ्फरनगर की अधिकारिक वेबसाइट पर मिलती है, जिसमें लिखा है ''ऐतिहासिक और राजस्व रिकॉर्ड बताते हैं इसका नाम पहले सरवट था, जो एक परगना यानि कई गांवों को मिलाकर बने भूभाग के रूप में जाना जाता था. शाहजहां ने अपने शासनकाल में इस इलाके को अपने प्रमुख सरदार सैय्यद मुजफ्फर खान को जागीर के रूप में दे दिया था. जिसने साल 1633 में खेरा और सुज्डू इलाके को लेकर मुजफ्फरनगर शहर की स्थापना की.

जबकि दूसरी कहानी इससे ही थोड़ी मिलती जुलती है, उसके मुताबिक मुजफ्फर खान के बेटे मुनव्वर खान ने इस शहर का नाम अपने पिता की याद में मुजफ्फरनगर रख दिया था, उसके बाद जब अंग्रेज आए तो ये आंदोलन का केन्द्र भी रहा, यहां से आजादी के आंदोलनों की रूपरेखा भी बनी, लेकिन शाहजहां से पहले का इतिहास उठाकर देखें तो पौराणिक मान्यता ये बताती है कि यहां शुक्रताल जैसे तीर्थ हैं, जहां राजा परीक्षित को शुकदेव स्वामी ने करीब 5 हजार साल पहले श्रीमद्भागवत यानि भागवतपुराण की कथा सुनाई थी. ये जगह मुजफ्फरनगर से करीब 28 किलोमीटर दूर गंगा किनारे स्थित है, जहां हर साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भारी संख्या में श्रद्धालु स्नान करने पहुंचते हैं, यहां कई और तीर्थस्थल भी हैं.

जिसका मतलब ये हुआ कि इस शहर का इतिहास सनातन सभ्यता से जुड़ा है, उससे पहले यहां हड़प्पा सभ्यता और संस्कृति से जुड़े कई अवशेष भी मिले हैं, पर अलग-अलग कालखंड में चूंकि अलग-अलग शासक यहां आते रहे, इसलिए मुगल दौर की कई कलाकृतियां भी यहां नजर आती हैं, कुछ साल पहले बीजेपी विधायक संगीत सोम ने भी इस शहर का नाम बदलने की मांग उठाई थी, और ये मांग तब ज्यादा जोर पकड़ने लगी जब योगी सरकार में कई शहरों के नाम बदले गए. जैसे इलाहाबाद का नाम प्रयागराज और मुगलसराय का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय किया जाना, तो सवाल ये है कि क्या मुजफ्फरनगर का नाम भी अब योगी आदित्यनाथ बदलने जा रहे हैं, या फिर पहले संभल का नाम सत्यव्रत नगर होगा उसके बाद मुजफ्फरनगर की फाइल खुलेगी?

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