तारीख- 11 अगस्त 2024 की रात, पुलिस एक वीडियो बनाती है, जिसमें नवाब सिंह यादव को गिरफ्तार किया जाता है. उसके बाद कई कहानियां सामने आती हैं और पहली नजर में ऐसा लगता है ये केस साजिशन बनाया गया है. सपा कार्यकर्ता और नवाब के समर्थक जांच से पहले ही नवाब को निर्दोष बताने लगे. बुआ का किरदार देखकर हर किसी को शक हुआ कि शायद ये झूठी कहानी गढ़ी जा रही है, लेकिन मेडिकल टेस्ट रिपोर्ट में ऐसा क्या आया कि एसपी को DNA टेस्ट के लिए कोर्ट से अनुमति मांगनी पड़ गई.
क्यों होता है डीएनए टेस्ट ये आपको बताएंगे, लेकिन एक बात साफ है अगर डीएनए टेस्ट पुलिस करवा रही है तो उस नाबालिग के साथ 100 प्रतिशत गलत होने की गुंजाइश है. डीएनए टेस्ट सिर्फ इस बात के सबूत पेश करेगा कि आरोपी नवाब सिंह यादव है या कोई और है. लेकिन पुलिस की गिरफ्तारी के दौरान वीडियो में नवाब सिंह यादव ही दिखता है, नाबालिग नवाब सिंह यादव पर ही आरोप लगाती है. और वहां नवाब के अलावा कैमरे में कोई दूसरा आदमी दिखता भी नहीं है.
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हमने आपको पहले ही बताया था बुलडोजर एक्शन 17 अगस्त के बाद होगा. ऐसा कहा जा रहा है कि योगी पहले पूरी रिपोर्ट देख लेना चाहते हैं, उसके बाद किसी फैसले पर पहुंचेंगे. क्योंकि सपा आरोपी के सहारे यूपी के सभी यादवों का नाम जोड़ेगी, जिससे बीजेपी को नुकसान हो सकता है. इसलिए पहले यूपी पुलिस का दूध का दूध पानी का पानी करेगी. डीएनए रिपोर्ट के बाद अगर नवाब पर आरोप साबित हो जाते हैं तो उसे इस जन्म में कोई नहीं बचा पाएगा.
हालांकि अखिलेश यादव अयोध्या के मोईद खान की तरह नवाब सिंह यादव के बचाव में भी खुलकर उतर गए हैं, उनसे जब सवाल पूछा गया तो वो जो कहते हैं वो आपको हैरान कर देगा. अब सवाल ये उठता है कि क्या अखिलेश यादव हर आरोपी के साथ खड़े हैं और अगर आरोपी मुस्लिम और यादव हो तो क्या नाबालिग के साथ हुई घटना अखिलेश हंस भी सकते हैं.
यूपी के पूर्व सीएम की ये असंवेदनशीलता क्या बताती है. कन्नौज तो पहले से ही इत्र की खुशबू को लेकर प्रसिद्ध फिर अखिलेश बे सिर पैर की ऐसी बातें क्यों कर रहे हैं. चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करते ही क्या अखिलेश यादव के सिर पर शनि की साढ़े साती सवार हो गई. क्योंकि अब इस बयान के बाद योगी को एक्शन लेने के लिए खुली आजादी मिल जाती है, जो अयोध्या में हुआ, वो सबकुछ कन्नौज में होने वाला है और बीजेपी इस बात को साबित करेगी कि समाजवादी पार्टी नहीं ये अपराधवादी पार्टी है, जहां अपराधियों को खुला संरक्षण मिलता है.
इधर एक नाबालिग इंसाफ की गुहार लगाती है, उधर आरोपी की बेटी अपने पिता की बेगुनाही की बात करते-करते फूट-फूटकर रोने लगती है, वो कहती है... मेरे पापा निर्दोष हैं, राजनीतिक षडयंत्र के तहत उन्हें फंसाया गया है, इस मामले में उनकी कोई गलती नहीं है. यही बात नवाब सिंह यादव का भाई भी दोहराता है, पर पुलिस की ओर डीएनए सैंपल लेने की अनुमति मांगना ये बताता है कि नवाब निर्दोष नहीं है. कुछ तो पुलिस के हाथ ऐसा लगा है, जिसके बाद नवाब के डीएनए सैंपल लेने की तैयारी होने लगी है.