मध्य प्रदेश में 11 बच्चों की मौत: 'जहर' वाली खांसी की सीरप देने वाला डॉक्टर गिरफ्तार

Amanat Ansari 05 Oct 2025 11:12: AM 4 Mins
मध्य प्रदेश में 11 बच्चों की मौत: 'जहर' वाली खांसी की सीरप देने वाला डॉक्टर गिरफ्तार

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में 11 बच्चों की मौत के बाद एक डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है. ये बच्चे कथित तौर पर दूषित खांसी की सीरप पीने से मरे. डॉक्टर का नाम प्रवीण सोनी है. उन्होंने बच्चों को कोल्डरिफ सीरप दी थी. ज्यादातर बच्चे उनके पर्सिया क्लिनिक पर इलाज करवा रहे थे. पुलिस ने तमिलनाडु की एक दवा कंपनी के मैन्युफैक्चरर को भी केस में नामित किया है, क्योंकि सीरप में कथित तौर पर मिलावट थी. मध्य प्रदेश पुलिस ने रविवार को सुबह-सुबह छिंदवाड़ा जिले के पर्सिया थाने में एफआईआर दर्ज की.

ये एफआईआर तमिलनाडु की स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी और एक लोकल पीडियाट्रिशियन के खिलाफ है. 11 बच्चों की मौत किडनी फेलियर से हुई, जो कथित तौर पर कोल्डरिफ खांसी की सीरप पीने से हुई. इस सीरप में जहर वाला इंडस्ट्रियल केमिकल मिला था. एफआईआर रविवार को सुबह 2:05 बजे दर्ज हुई. ये भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 और 276 के तहत दर्ज की गई, साथ ही ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 की धारा 27(ए) के तहत.

शिकायत पर्सिया के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकित साहलम ने दी. शिकायत में कहा गया कि कई 5 साल से कम उम्र के बच्चे सीरप पीने के बाद मर गए. बाद में पता चला कि सीरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (डीईजी) नामक जहर था, जो एंटीफ्रीज और ब्रेक फ्लूइड में इस्तेमाल होता है. एफआईआर के मुताबिक, तमिलनाडु के ड्रग्स कंट्रोल डायरेक्टर की लैब रिपोर्ट (2 अक्टूबर 2025) में पुष्टि हुई कि स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स, कांचीपुरम द्वारा बनी कोल्डरिफ सीरप (बैच नंबर एसआर-13, मैन्युफैक्चर मई 2025, एक्सपायरी अप्रैल 2027) में 48.6% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल था.

भोपाल की गवर्नमेंट ड्रग टेस्टिंग लैब ने भी 46.28% यही जहर पाया. दोनों रिपोर्ट्स में सैंपल को मिलावटी और सेहत के लिए हानिकारक बताया गया. शिकायत में विस्तार से बताया गया कि ये बच्चे सभी 5 साल से कम उम्र के कोल्ड, खांसी और बुखार के लिए पर्सिया के सीएचसी में तैनात गवर्नमेंट पीडियाट्रिशियन प्रवीण सोनी के पास इलाज के लिए गए. कुछ दिनों में उनकी यूरिन कम हो गई और क्रिएटिनिन व यूरिया लेवल बढ़ गया, जो किडनी इंजरी के लक्षण हैं. इनमें से 10 बच्चे नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मर गए.

एफआईआर में स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स के डायरेक्टर्स, पर्सिया के डॉ. प्रवीण सोनी और अन्य जिम्मेदार लोग को नामित किया गया, जो मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई में शामिल थे. एफआईआर में मेडिकल रिकॉर्ड्स और लैब रिपोर्ट्स का हवाला दिया गया, जो 4 साल के विकास यादवांशी की किडनी बायोप्सी से कन्फर्म हुई. ये बायोप्सी नागपुर के जीएमसी में हुई.जांचकर्ताओं ने कहा कि 6 और बच्चे नागपुर में हॉस्पिटल में किडनी की दिक्कतों से भर्ती हैं.

अधिकारियों ने बताया कि जबलपुर के ड्रग इंस्पेक्टर को भी एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अभी तक वहां कोई केस दर्ज नहीं हुआ. कोल्डरिफ जो कुछ पीड़ितों ने पीया था की लैब रिपोर्ट में जहर वाला इंडस्ट्रियल केमिकल मिला. इससे राज्य ने इसकी बिक्री बैन कर दी. रिपोर्ट, जो शनिवार को तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल डिपार्टमेंट से एमपी गवर्नमेंट को मिली, में कहा गया कि सैंपल मिलावटी है, क्योंकि इसमें 48.6% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल है.

डीईजी, जो एंटी-फ्रीज और ब्रेक फ्लूइड में इस्तेमाल होता है, पीने पर किडनी फेलियर और मौत का कारण बनता है. राज्य सरकार ने तुरंत कोल्डरिफ पर कार्रवाई का आदेश दिया, जो टीएन की स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बनी है. फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने सभी ड्रग इंस्पेक्टर्स को मौजूदा स्टॉक जब्त करने, बिक्री रोकने और दूसरे बैच के सैंपल टेस्ट करने के निर्देश दिए. सरकार ने कंपनी की सभी दूसरी दवाओं पर भी बैन लगा दिया.

एमपी के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक्स पोस्ट में कहा कि छिंदवाड़ा में बच्चों की मौत कोल्डरिफ सीरप से होना बेहद दर्दनाक है. शनिवार शाम को उन्होंने प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को 4 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की. जो बच्चे अभी इलाज करवा रहे हैं, उनका खर्च राज्य सरकार वहन करेगी, यादव ने कहा. एमपी और राजस्थान में खांसी की सीरप से मौतों ने पूरे देश में अलार्म बजा दिया. कई राज्यों ने जांच शुरू की और सावधानी के कदम उठाए.

सेंट्रल ड्रग स्टैंडर्ड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने 6 राज्यों—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, तमिलनाडु, एमपी और महाराष्ट्र में ड्रग मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स का रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन शुरू किया. जांच खासतौर पर खांसी की सीरप, बुखार की दवा और एंटीबायोटिक्स बनाने वाली कंपनियों पर है. इनके सैंपल उन इलाकों से लिए गए जहां मौतें हुईं. छिंदवाड़ा में ये मौतें एक महीने में हुईं. सभी बच्चे 5 साल से कम उम्र के थे.

किडनी फेलियर खांसी की सीरप पीने से हुई, जो लोकल प्राइवेट क्लिनिक्स के डॉक्टरों ने दी थी. नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 5 बच्चे ठीक हो रहे हैं .ये मौतें अगस्त के आखिर में पहली बार रिपोर्ट हुईं. ज्यादातर पर्सिया तहसील के गांवों में हुईं. बच्चे पहले कोल्ड और हल्के बुखार के लक्षण दिखा रहे थे. उन्हें खांसी की सीरप और रूटीन दवाएं दी गईं. लेकिन उनकी हालत बिगड़ गई यूरिन कम हो गया और किडनी की गंभीर दिक्कतें हो गईं.

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