समाजवादी पार्टी के वो दो नेता कौन हैं, जो अयोध्या के मव्वाली मोईन खान को बचाना चाहते हैं, उसकी पापों पर पर्दा डालना चाहते हैं. आधी रात को वो अस्पताल में जाकर लड़की और उसकी मां को कहते हैं FIR वापस ले लो, वरना नहीं छोड़ूंगा. ये हालत तब है जब लड़की दलित है, क्या अखिलेश के पीडीए का काला सच यही है, हम इस पर आएंगे लेकिन उससे पहले सुनिए ये दोनों नेता हैं कौन और इनके साथ अब क्या होने वाला है. पहले नेता का नाम है मोहम्मद राशिद, जो नगर पंचायत चेयरमैन है और मोईन खान का करीबी बताया जाता है, जबकि दूसरे सपा नेता का नाम है जय सिंह राणा. जिनके खिलाफ पुलिस को दी गई शिकायत में लिखा है कि रात 11 बजे ये अपने लोगों के साथ जिला अस्पताल आते हैं और वहां ये कहकर लौट जाते हैं कि केस-मुकदमे में कुछ नहीं रखा, एफआईआर वापस ले लो, वरना ठीक नहीं होगा.
बड़ी बात ये है कि जब ये मुलाकात करने पहुंचे थे तो लड़की को ये लगा था कि हाल-चाल लेने आए हैं. ये सब मोईन खान की तरह नहीं है, पर उसकी आंखों के आगे तब अंधेरा छा गया जब इनकी बातें सुनी. अब दोनों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और सबूत मिलते ही गिरफ्तारी भी हो सकती है. क्योंकि इस केस को खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देख रहे हैं और योगी की टेबल पर राजस्व विभाग की जो फाइल पहुंची है उसमें साफ-साफ लिखा है आरोपी मोईन खान ने तालाब और कब्रिस्तान की जमीन पर कब्जा जमाया है, जिस पर बुलडोजर चलाने की तैयारी शुरू हो चुकी है, जिस बेकरी में उसने गलत किया उस बेकरी पर छापा मारने पहुंची पुलिस टीम को कुछ ऐसा हाथ लगा है, जो मोईन खान ही नहीं बल्कि सपा के कई नेताओं की मुश्किलें बढ़ा सकता है, पुलिस ने उसकी बेकरी को सील कर दिया है.
पर सवाल मोईन खान से ज्यादा समाजवादी पार्टी पर है, जो अखिलेश पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक की बात करते घूमते हैं. क्या उनका दलित न्याय यही है, यहां तक कि भीम आर्मी चीफ और नगीना से सांसद चंद्रशेखर का भी कोई बयान सामने नहीं आता है, जो ये बताता है कि इन्हें सिर्फ अपने वोटबैंक की चिंता है, इन्हें दलितों और पिछड़ों को न्याय दिलाने से कोई मतलब नहीं है. यही इस केस में आरोपी मोईन की जगह अगर मयूर होता तो कांग्रेस से लेकर सपा तक सब टूट पड़ते, हाथों में तख्तियां लेकर सड़कों पर उतर जाते, योगी सरकार पर एक्शन लेने का दबाव बनाते, लेकिन जैसे ही आरोपी इनकी पार्टी का निकला, इनके लोग योगी के एक्शन का समर्थन करने की बजाय केस वापस लेने का दबाव बनाने लगे.
आपको याद होगा हाथरस केस में जब आरोपी संदीप सिंह था, और लड़की दलित थी तो राहुल गांधी रोकने के बावजूद भी वहां जाने से नहीं रुक रहे थे, खेत के रास्ते बाइक पर बैठकर हाथरस जाने की जिद्द पर अड़े थे, प्रियंका गांधी पुलिस के रोकने के बाद भी नहीं रुक रही थीं, लेकिन अब कोई भी अयोध्या जाने को तैयार नहीं है, जाना छोड़िए इस मामले पर बोलना भी नहीं चाहता, अंदर ही अंदर शायद मोईन खान को बचाने की प्लानिंग बनाई जा रही है, तभी तो अस्पताल में जाकर केस वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसके साथ गलत हुआ, उसकी कीमत लगाई जा रही है.
ऐसे नेता कैसे अपने इलाके के बहन-बेटियों से वोट मांगेंगे, हैरानी की बात तो ये है कि अखिलेश ऐसे नेताओं पर न तो कोई एक्शन ले रहे हैं, और ना ही कुछ बोल रहे हैं, क्या ये नेता उनके पीडीए फॉर्मूले का वो काला हिस्सा है, जिसे वो पर्दे के पीछे रखना चाहते हैं, पर अब वो सामने आने लगे हैं.