कोलकाता: पश्चिम बंगाल के चर्चित म्युनिसिपल भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने शनिवार को बड़ा एक्शन लेते हुए तृणमूल कांग्रेस विधायक मदन मित्रा से जुड़े सात ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. यह कार्रवाई कोलकाता और आसपास के इलाकों में की गई, जहां जांच एजेंसी ने कई दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े साक्ष्य खंगाले.
ईडी की जांच का केंद्र पश्चिम बंगाल की विभिन्न नगरपालिकाओं में हुई कथित अवैध भर्तियां हैं. आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर योग्य उम्मीदवारों की जगह पैसे लेकर लोगों को नौकरी दी गई. जांच एजेंसियों के अनुसार, नगर निकायों में क्लर्क, सहायक और अन्य पदों पर नियुक्तियों के लिए अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली गई थी. इस कथित भर्ती रैकेट के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन की आशंका जताई जा रही है.
मामले की जांच पहले से ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और ED द्वारा की जा रही है. एजेंसियों का दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में प्रभावशाली राजनीतिक और प्रशासनिक लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. इसी क्रम में मदन मित्रा और उनके करीबी लोगों के परिसरों पर तलाशी अभियान चलाया गया.
हालांकि, मदन मित्रा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उनका इस कथित घोटाले से कोई संबंध नहीं है और वे जांच में पूरा सहयोग करेंगे. दूसरी ओर, भाजपा ने इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है, जबकि TMC का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को परेशान किया जा रहा है.
फिलहाल ED की छापेमारी जारी है और जांच एजेंसी जुटाए गए दस्तावेजों व डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है. मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.