नई दिल्ली: गुजरात के गिर-सोमनाथ जिले के कोडिनार तालुका स्थित छारा गांव के प्राथमिक शिक्षक एवं बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) अरविंद लाडुभाई वाढ़ेर (40) ने शुक्रवार देर रात स्कूल परिसर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. आत्महत्या से पहले उन्होंने पत्नी संगीता के नाम एक भावुक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें स्पष्ट रूप से Special Intensive Revision (SIR) के अत्यधिक कार्यभार को अपनी मौत का कारण बताया.
सुसाइड नोट में अरविंद ने लिखा, ''मुझसे अब यह SIR का काम नहीं हो सकेगा. मैं कई दिनों से बहुत थकान और परेशानी महसूस कर रहा हूं. मेरे बैग में SIR के सारे कागजात हैं, उन्हें स्कूल में जमा कर देना. मैं तुम दोनों से बहुत प्यार करता हूं, लेकिन अब मैं पूरी तरह मजबूर हो चुका हूं.''
घटना के बाद से पूरे राज्य में शिक्षक समुदाय में आक्रोश है. अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (गुजरात) ने शनिवार को तत्काल प्रभाव से SIR से जुड़े सभी कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करने की घोषणा कर दी है. संगठन ने चेतावनी दी है कि जब तक चुनाव आयोग शिक्षकों से यह अतिरिक्त जिम्मेदारी पूरी तरह नहीं हटाता, तब तक कोई भी शिक्षक मतदाता सूची संशोधन का काम नहीं करेगा. गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों में देश भर में SIR के दबाव में यह आठवीं मौत है.
किस राज्य में कितनी मौत
वहीं तमिलनाडु में एक बीएलओ ने आत्महत्या करने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान बच गई. उन्होंने 44 गोलियां एक साथ खा लिया था. परिजनों और शिक्षक संगठनों का एक ही आरोप है कि शिक्षकों को पढ़ाने के साथ-साथ दिन-रात फॉर्म भरवाने, ऑनलाइन एंट्री करने और अधिकारियों के दबाव में रखा जा रहा है.
कई मामलों में शिक्षकों को धमकी दी गई कि काम नहीं किया तो वेतन रोका जाएगा. शिक्षक संघों ने सरकार और चुनाव आयोग से मांग की है कि मतदाता सूची संशोधन का पूरा काम अलग से नियुक्त स्टाफ को सौंपा जाए, शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाए. अरविंद के छह वर्षीय बेटे कृषाय को अभी तक नहीं पता कि उसके पापा अब कभी स्कूल से घर नहीं लौटेंगे.