नई दिल्ली: महाराष्ट्र के स्थानीय निकाय चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के अंदर खुला विद्रोह साफ दिख रहा है. भले ही प्रदेश में देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री हों और एकनाथ शिंदे उपमुख्यमंत्री, लेकिन नगर परिषद-नगर पंचायत चुनावों में भाजपा और शिंदे सेना एक-दूसरे के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ रहे हैं.
सबसे तीखा टकराव पालघर जिले के दहाणु में देखने को मिला. वहाँ शिंदे गुट के उम्मीदवार के समर्थन में पहुंचे मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भाजपा पर सीधा हमला बोला. बिना नाम लिए उन्होंने कहा, “अहंकार करने वालों का हमेशा नाश होता है. जिस तरह रावण के अहंकार में लंका जल गई थी, उसी तरह 2 दिसंबर को दहाणु की जनता भी अहंकारी ताकतों को सबक सिखाएगी.”
शिंदे ने भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ एकजुट होने की अपील की. दहाणु में दोनों गुटों की एनसीपी ने भी शिंदे गुट के उम्मीदवार राजू माछी का साथ दिया है, जबकि भाजपा ने अपने जिला अध्यक्ष भरत राजपूत को मैदान में उतारा है.
जवाब में उसी दहाणु में पहुंचे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने शिंदे के बयान का करारा जवाब दिया. उन्होंने कहा, “कुछ लोग लंका जलाने की बात करते हैं, पर हम तो लंका में रहते ही नहीं. हम रामभक्त हैं, रावणभक्त नहीं.” फिर तंज कसते हुए बोले, “हमारा उम्मीदवार ‘भरत’ है और भरत तो राम का छोटा भाई होता है. अगर कोई विकास के रास्ते में रोड़ा बनेगा, तो भरत ही लंका जला देगा.”
दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का नाम नहीं लिया, लेकिन रामायण के किरदारों के जरिए एक-दूसरे पर जो तीर छोड़े, वो पूरी तरह निशाने पर लगे. भाजपा और शिंदे सेना के कार्यकर्ता भी अब खुलकर एक-दूसरे पर हमलावर हो रहे हैं.
2 दिसंबर को 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों में वोटिंग है. करीब सवा सात हजार पार्षद और 288 अध्यक्ष चुने जाने हैं. अभी तक लगभग 100 सीटें निर्विरोध जा चुकी हैं, जिनमें सबसे ज्यादा भाजपा के हिस्से आई हैं. 3 दिसंबर को नतीजे आएंगे, तब पता चलेगा कि रामभक्तों की जीत हुई या अहंकार को जनता ने सचमुच जला दिया.