चाय-पत्ती और बिस्किट ले जाने पर 17 साल की नौकरी गई, झारखंड हाईकोर्ट ने किया बहाल! कहा- सजा आनुपातिक नहीं थी

Amanat Ansari 02 Jul 2026 10:37: AM 1 Mins
चाय-पत्ती और बिस्किट ले जाने पर 17 साल की नौकरी गई, झारखंड हाईकोर्ट ने किया बहाल! कहा- सजा आनुपातिक नहीं थी

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने एक अजीबोगरीब मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. बोकारो जिले के DRDA (District Rural Development Agency) में काम करने वाले पीओन रंजीत कुमार हिमांशु को सिर्फ चाय-पत्ती और बिस्किट ले जाने के आरोप में नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था. कोर्ट ने इस सजा को अनुपातिक (Disproportionate) बताते हुए उन्हें बहाल कर दिया है.

मार्च 2022 में डिप्टी डेवलपमेंट कमिश्नर ने रंजीत को शो-कॉज नोटिस जारी किया था. आरोप था कि उन्होंने ऑफिस से चाय की पत्ती और बिस्किट घर ले गए. रंजीत ने स्वीकार किया कि उन्होंने बचे हुए सामान ले लिया था और बाद में लौटा भी दिया. इसके बावजूद मई 2022 में उनकी संविदा सेवा समाप्त कर दी गई.

चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की बेंच ने कहा कि 17 साल की सेवा के बाद छोटी-सी गलती पर किसी कर्मचारी को बर्खास्त करना उचित नहीं है. सजा अपराध के अनुपात में होनी चाहिए.

कोर्ट ने DRDA बोकारो को 10 जुलाई तक रंजीत को बहाल करने और 30 जुलाई तक बकाया वेतन का 50% भुगतान करने का आदेश दिया है. यह फैसला सरकारी विभागों में छोटी-मोटी गलतियों पर की जाने वाली कठोर कार्रवाइयों पर सवाल उठाता है और कर्मचारियों के हितों की रक्षा करता है.

Jharkhand High Court Bokaro DRDA Ranjit Kumar Himanshu peon dismissa

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