लखनऊ: विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में उत्तर प्रदेश में भी ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (HMPV) वायरस का पहला मामला मिलने का दावा किया जा रहा है. जानकारी मिली है कि यूपी की राजधानी लखनऊ में एक 60 वर्ष की महिला HMPV पॉजिटिव पाई गईं है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि महिला को बुखार आया था और सांस भी फूल रही थी. इसके बाद उसे स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां HMPV होने की पुष्टि की गई है. महिला को फिलहाल बलरामपुर अस्पताल रेफर किया गया है. वहीं उत्तर प्रदेश के अधिकारी लगातार महाकुंभ में भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. हालांकि विशेषज्ञों का दावा है कि यह वायरस खतरनाक नहीं फिर भी सतर्क रहने की सलाह दी जाती है.
चुनौती को देखते हुए संत समाज सतर्क
बता दें कि प्रयागराज में शुरू होने जा रहे महाकुंभ पर इसके संभावित असर से सभी चिंता में हैं. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने इस चुनौती के बारे में बताया कि संत समाज किस तरह से वायरस के संभावित खतरे के प्रति खुद को इस महाकुंभ में तैयार कर रहा है. रवींद्र पुरी ने बताया कि हमें भी ज्ञात हुआ है कि कुछ दिन पहले चीन से कोरोना जैसा एक वायरस भारत में आ रहा है. सुनने में आया है कि यह वायरस भारत में पहुंच गया है. करीब सात-आठ की संख्या में केस हमारे देश में अब तक मिल चुके हैं. हम जितने भी साधु संत हैं, जितने भी हमारे श्रद्धालु हैं, जितने भक्त हैं, जिसको भी जुकाम होगा, जिसको भी खांसी होगी, उनको हमें अपने कैंप से दूर रखना पड़ेगा.
जागरूकता से पाया जा सकता है काबू
बता दें कि सरकार ने इस वायरस को लेकर सभी राज्यों से सावधानी और सतर्कता बरतने को कहा है. यह वायरस कितना खतरनाक है, इस पर आईएएनएस ने सीके बिड़ला हॉस्पिटल के निदेशक, पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. विकास मित्तल से बात की. डॉ. विकास मित्तल ने कहा कि यह कोई नया वायरस नहीं है. यह मुख्य रूप से हल्के श्वसन रोगों से जुड़ा हुआ है. कर्नाटक में हाल ही में तीन महीने के बच्चे का मामला पाया गया जो इस वायरस से संक्रमित था. बच्चे को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई. यह मामला बताता है कि इस वायरस से उत्पन्न बीमारी में आमतौर पर हल्के लक्षण पैदा होते हैं.
बच्चे-बुजुर्ग ज्यादा हाई रिस्क ग्रुप में
हालांकि, एक साल से छोटे बच्चे, 60 साल से अधिक उम्र के लोग, और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग या जो लोग पहले से ही कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें ज्यादा ध्यान रखने की जरूरत है. ये लोग हाई रिस्क ग्रुप में आते हैं. उन्होंने कहा कि इसके लक्षणों में खांसी, बुखार, नाक बंद होना और सांस लेने में तकलीफ होना शामिल है. वहीं, इसके गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने के साथ ऑक्सीजन थेरेपी और वेंटिलेशन की भी आवश्यकता हो सकती है.
खतरनाक नहीं है एचएमपीवी वायरस
हालांकि, आम लोगों के लिए यह वायरस बहुत खतरनाक नहीं माना जाता. यह कोविड-19 वायरस के मुकाबले ज्यादा खतरनाक नहीं है. पहले के संपर्क से बनी आंशिक रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) इसके असर को कम कर सकती है. इसका जल्दी पता लगाए जाने के साथ जागरूकता से काबू पाया जा सकता है. उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान आंकड़ों से पता चलता है कि एचएमपीवी खतरनाक वायरस नहीं है. इसलिए इससे डरने की जरुरत नहीं है. इससे बचने के लिए मास्क पहनना और लक्षण वाले व्यक्तियों से दूरी बनाए रखने से इसे फैलने से रोका जा सकता है.