नई दिल्ली: आज पूरा देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है. इस मौके पर सबसे सुखद खबर छत्तीसगढ़ से आई है. यहां के नक्सल प्रभावित 29 गांवों में आजादी के बाद पहली बार तिरंग फहराया गया है. 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन सभी गांवों में पुलिस कैंप स्थापित किए गए थे. बस्तर संभाग के ये साथ जिले पिछले तीन दशकों से वामपंथी उग्रवाद से जूझ रहे थे.
यहां लोगों को अक्सर नकस्लियों के द्वारा प्रताड़ित किया जाता था और दबाब बनाया जाता था कि वे नक्सिलयों के गुक्मों का पालन करें. इनकार करने पर तरह-तरह की यातनाएं दी जाती थी. नक्सली भारत की आजाती को झूठी आजादी बताते थे और राष्ट्र पर्व का विरोध करते थे. इस दौरान नक्सलियों द्वारा काले झंडे भी फहराए जाते थे. हालांकि पिछले दो वर्षों में स्थिति में सुधार हुआ है.
इन इलाकों में अब धीरे-धीरे पुलिस चौकी स्थापित किए जा रहे हैं. साथ ही विकास को भी गति मिली है. सुरक्षा बलों, प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास जगा है. लोग अब खुलकर सुरक्षा बलों का सहयोग करते हैं. वहीं स्वतंत्रता दिवस के दिन नारायणपुर जिले के होरादी, गारपा, कछपाल, कोडलियार, कुटुल, बडेमाकोटी, पदमाकोट, कंदुलनार, नेलांगुर, पांगुर और रायनार गांवों में तिरंगा फहराया गया.
सुकमा जिले के रायगुडेम, तुमालपद, गोलाकुंडा, गोमगुडा, मेट्टागुडा, उस्कवाया और मुलकाथोंग जैसे गांवों में पहली बार तिरंगा लहराया. बीजापुर जिले के कोन्डापल्ली, जीदापल्ली, वातेबागु, कर्रेगुट्टा, पिदिया, गुंजेपार्टी, पुजारी, कांकेर, भीमराम, कोरचोली और कोटपल्ली में भी तिरंगा फहराकर उत्सव मनाया गया.
जिला रिजर्व गार्ड, बस्तर फाइटर्स, विशेष कार्य बल और राज्य पुलिस की सभी इकाइयों के साथ-साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवान अपने क्षेत्र में लगातार गश्त और अन्य सुरक्षा गतिविधियां कर रहे हैं. सुकमा के एसपी किरण चौहान ने बताया कि भीतरी इलाकों में लगातार पुलिस कैंप स्थापित किए जा रहे हैं. राज्य सरकार की नल्लनार योजना के तहत इन गांवों में सड़क, बिजली, मोबाइल टावर और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है.
नल्लनार योजना का लक्ष्य बीजापुर, सुकमा, कांकेर, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे नक्सल प्रभावित जिलों में विकास को बढ़ावा देना और लोगों को आवश्यक सेवाओं व कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है.