Pakistan-UAE Dispute: यूनाइटेड अरब अमीरात (UAE) ने हाल के महीनों में पाकिस्तान के हजारों शिया मुस्लिम नागरिकों को देश से निकाल दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, फरवरी के अंत में अमेरिका-इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्रीय तनाव बढ़ने से यह कार्रवाई तेज हुई. अनुमान है कि 7,500 से ज्यादा पाकिस्तानी शियाओं को प्रभावित किया गया है.
कई दशकों से UAE पाकिस्तानी मजदूरों के लिए बड़ा रोजगार केंद्र रहा है. निर्माण, सर्विस और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले ये लोग अब अचानक बिना सामान और बचत के वापस लौट रहे हैं. प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें नाम (जैसे अली, हुसैन आदि) या शिया होने के आधार पर निशाना बनाया गया. कई परिवारों के बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए और उन्हें सामान समेटने का भी मौका नहीं मिला.
शिया संगठनों का आरोप
पाकिस्तान के शिया संगठन मजलिस वाहदत-ए-मुसलमीन ने एक डेटाबेस तैयार किया है, जिसमें 7,500 से ज्यादा लोगों के नाम हैं. संगठन के नेता कहते हैं कि असली संख्या और भी ज्यादा हो सकती है. इस्लामाबाद के शिया धर्मगुरु मोहम्मद अमीन शहीदी ने कहा कि खाड़ी देशों में शियाओं को ईरान का समर्थक मानकर देखा जा रहा है. उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे पर UAE के सामने मजबूती से आवाज उठाने में हिचक रही है, क्योंकि दोनों देशों के रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे.
पाकिस्तान सरकार का पक्ष
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि जो लोग डिपोर्ट किए गए, वे आपराधिक गतिविधियों या वीजा नियमों के उल्लंघन में शामिल थे. किसी खास समुदाय को टारगेट नहीं किया जा रहा है. 1979 की ईरानी क्रांति के बाद खाड़ी देशों में शिया समुदाय को लेकर सुरक्षा एजेंसियों में शक की भावना रही है. ईरान के 'विलायत-ए-फकीह' जैसे सिद्धांत और क्षेत्रीय राजनीति ने इस अविश्वास को और बढ़ाया है.
मौजूदा ईरान युद्ध ने इन पुरानी चिंताओं को फिर से जगा दिया. यह घटना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि विदेशी कमाई (रेमिटेंस) देश के लिए महत्वपूर्ण है. प्रभावित परिवार अब बेरोजगारी और आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं.