नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने एक बड़ा और विवादित आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि भारत में चल रहे मौजूदा आंदोलनों के पीछे अमेरिकी सरकार हो सकती है और वह इन्हें गुप्त रूप से फंड कर रही है. एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए काटजू ने लिखा, ''मुझे हैरानी नहीं होगी अगर अमेरिकी सरकार भारत के मौजूदा आंदोलन के पीछे हो और उसे गुप्त रूप से फंड दे रही हो.''
उन्होंने इसका कारण भारत की BRICS में सक्रिय भूमिका और रूस-चीन के साथ बढ़ते रिश्तों को बताया. काटजू के अनुसार, अमेरिका इसलिए नाराज है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी BRICS में शामिल हुए हैं. BRICS का नेतृत्व चीन और रूस कर रहे हैं, जिन्हें उन्होंने अमेरिका के ''दुश्मन'' करार दिया.
उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इन देशों के साथ नजदीकी बढ़ा रही है, जिस वजह से वॉशिंगटन भारत के अंदर असंतोष को हवा दे सकता है. यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ने सितंबर 2026 में नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित किया. इस दौरान पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की.
भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार भी है और दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने की दिशा में काम कर रहे हैं. भारत-अमेरिका संबंधों में टैरिफ, व्यापार और रूसी तेल खरीद को लेकर मतभेद जरूर हैं, लेकिन रक्षा और रणनीतिक सहयोग जारी है. काटजू का दावा अभी तक सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राय है, कोई पुष्ट सबूत सामने नहीं आया है.