यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर लगातार हमलों के बीच फ्रांस ने बड़ा कदम उठाया है. फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने रविवार को साफ कहा कि सऊदी अरब को फ्रांस का सैन्य समर्थन “सख्ती से रक्षात्मक” है और पेरिस किसी संघर्ष में भागीदार नहीं बन रहा. राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने गुरुवार को घोषणा की थी कि फ्रांस सऊदी अरब में सैनिक, रडार यूनिट और रक्षा प्रणालियां भेजेगा.
खास तौर पर लाल सागर के बंदरगाह यनबू की सुरक्षा के लिए. यनबू सऊदी अरब का प्रमुख तेल भंडारण और रिफाइनिंग केंद्र है, जो ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से जुड़ा है. यह पाइपलाइन रोजाना सात मिलियन बैरल तक तेल ले जा सकती है. बैरो ने फ्रांस 2 चैनल से बातचीत में कहा, “बिल्कुल नहीं… यह पूरी तरह रक्षात्मक है.” उन्होंने जोर दिया कि फ्रांस सहयोगियों और साझेदारों की सुरक्षा के लिए सैन्य संपत्ति तैनात कर रहा है, लेकिन इसे कभी भी संघर्ष में भागीदारी नहीं माना जा सकता.
यह कदम जुलाई में यमन युद्ध फिर से भड़कने के बाद हूतियों के मिसाइल और ड्रोन हमलों के जवाब में लिया गया है. हूतियों ने गुरुवार को यनबू में अरामको के सुविधाओं और रियाद में एक “संवेदनशील लक्ष्य” पर हमले का दावा किया था. सऊदी बलों ने छह बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का दावा किया, जबकि नुकसान की पुष्टि नहीं हुई.
बैरो ने बताया कि फ्रांसीसी तैनाती का पैमाना सऊदी अरब की मांग, फ्रांस की क्षमता और क्षेत्रीय स्थिति पर निर्भर करेगा. हूती हमलों ने सऊदी ऊर्जा निर्यात मार्गों पर दबाव बढ़ा दिया है. उन्होंने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का करीब 12 प्रतिशत गुजरता है.
इस बीच सऊदी अरब अपने सहयोगियों पाकिस्तान और तुर्की के साथ भी व्यापक रक्षा प्रतिक्रिया पर चर्चा कर रहा है. फ्रांस का यह कदम क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां हूती हमलों ने सऊदी अरब की ऊर्जा सुरक्षा को चुनौती दी है. पेरिस बार-बार दोहरा रहा है कि उसकी भूमिका सिर्फ सहयोगी की रक्षा और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा तक सीमित है.