अडानी समूह के संस्थापक और अध्यक्ष गौतम अडानी ने मुंबई के एक कॉलेज में भाषण के दौरान धारावी पुनर्विकास परियोजना पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि यह केवल "शहरी नवीनीकरण" के बारे में नहीं है, बल्कि "हमारे देश के दस लाख से अधिक निवासियों को सम्मान वापस दिलाने" के बारे में है. मुंबई के जय हिंद कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए गौतम अडानी ने शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को शुभकामनाएं दीं.
उन्होंने कहा कि मैं यहां मौजूद सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देता हूं...मुझे यह जानकर आश्चर्य होता है कि 75 साल पहले, कराची के डीजे सिंध कॉलेज के दो दूरदर्शी प्रोफेसरों ने दो छोटे कमरों में इन संस्थानों की नींव रखी थी. हमारे देश के विभाजन के दौरान अपार चुनौतियों और मानव विस्थापन के बावजूद, उन्होंने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की, जहां शिक्षा की शक्ति लोगों को ठीक कर सके और उन्हें एकजुट कर सके.
उन्होंने कहा कि मैं आज यहां खड़ा हूं, विनम्र और आभारी हूं, विक्रम नानकानी द्वारा इस ऐतिहासिक मंच से अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया गया. जिस तरह जय हिंद कॉलेज सीमाओं को तोड़ने और नई संभावनाएं बनाने के सिद्धांत पर बनाया गया था, उसी तरह मेरी बातचीत का विषय उन प्रेरणाओं पर केंद्रित होगा, जिन्होंने मुझे अपनी सीमाओं को पार करने की अनुमति दी.
गौतम अडानी ने कहा कि हर देश के अपने परिवर्तनकारी वर्ष होते हैं जो उसके भविष्य की दिशा बदलते हैं. हर देश के अपने परिवर्तनकारी वर्ष होते हैं जो उसके भविष्य की दिशा बदलते हैं. 1947 एक स्वतंत्र भारत के बारे में था. 1991 हमारे व्यवसायों के उदारीकरण के बारे में था और 2014 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, स्वतंत्रता का सार और तेज हो गया क्योंकि सुधार और निर्णायक शासन केंद्र में आ गए.
ये सभी वर्ष भारत की उल्लेखनीय यात्रा में एक दूसरे के निर्माण के रूप में महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में खड़े हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य उन लोगों का है जो वर्तमान से परे देखने की हिम्मत रखते हैं, जो पहचानते हैं कि आज की सीमाएं कल के शुरुआती बिंदु हैं. उन्होंने मुंद्रा बंदरगाह के विकास के बारे में बात की, जो अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे और सबसे बड़े कोयला आयात टर्मिनल के साथ भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बंदरगाह है.
1995 में, गुजरात सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से अपने बंदरगाह-आधारित औद्योगिक विकास योजना की घोषणा की. उस समय के आसपास, वैश्विक कमोडिटी व्यापारी कारगिल ने हमसे संपर्क किया था. यह कच्छ क्षेत्र से नमक के निर्माण और सोर्सिंग के लिए साझेदारी करने का प्रस्ताव था. हालांकि साझेदारी नहीं हो पाई, लेकिन हमारे पास लगभग 40,000 एकड़ दलदली भूमि और नमक के निर्यात के लिए मुंद्रा में एक कैप्टिव जेटी बनाने की मंजूरी बची रही.
धारावी परियोजना को लेक उन्होंने कहा कि यह केवल "शहरी नवीनीकरण" के बारे में नहीं है, बल्कि "हमारे देश के दस लाख से अधिक निवासियों को सम्मान वापस दिलाने" के बारे में है. बता दें कि धारावी को रीडेवलप करने की योजना पहली बार 1980 में बनाई गई थी, पर अब तक सिरे नहीं चढ पाई है. 2004 में महाराष्ट्र राज्य सरकार ने धारावी का बेहतर सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ कायाकल्प करने की परिकल्पना की थी.
इस परियोजना के तहत झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों वाले लोगों सहित 68000 लोगों को शिफ्ट करना शामिल था और जिन लोगों की झुग्गी-झोपड़ी यहां 1 जनवरी 2000 से पहले अस्तित्व में है उन्हें 300 वर्ग फीट का घर सरकार की तरफ से फ्री में दिया जाना था, लेकिन योजना बनी पर इस पर काम नहीं हुआ.