नई दिल्ली/कोलकाता: भूटान में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की घटना के बाद भारत में पश्चिम बंगाल और असम के कई जिलों में बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया गया है. संकोश नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि की आशंका के मद्देनजर उत्तर बंगाल के अलीपुरद्वार समेत अन्य इलाकों में बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन हाई अलर्ट पर बना हुआ है.
गुरुवार शाम भूटान के गासा जिले में वाकिला पर्वत के नीचे स्थित शिंताफू (Shintaphu) झील से पानी का अचानक रिसाव हुआ. यह झील भूटान की 17 संभावित खतरनाक ग्लेशियल झीलों में शामिल है. झील से निकला पानी मो छू (Mo Chhu) नदी के रास्ते नीचे की ओर बढ़ा, जिससे फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हुई. भूटान में इस घटना से सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई परियोजना को आंशिक नुकसान पहुंचा.
पुनाखा-गासा हाईवे पर मलबा जमा होने से सड़क प्रभावित हुई. गैस त्साचू जैसे इलाकों में भी बुनियादी ढांचे को नुकसान की खबरें हैं. फिलहाल भूटान में किसी के हताहत होने की कोई रिपोर्ट नहीं है. भारत सरकार ने विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए संकोश नदी (जो भूटान में पुनात्सांगचू के नाम से जानी जाती है) के जलस्तर में अचानक वृद्धि की चेतावनी दी. पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और दार्जिलिंग क्षेत्र के साथ असम के धुबरी जिले को हाई अलर्ट पर रखा गया.
अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शाव के अनुसार, करीब 4,000 से 5,000 लोगों को स्कूलों समेत राहत शिविरों में पहुंचाया गया, जबकि 6,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित इलाकों में शिफ्ट किया गया. कुल मिलाकर 10,000 से ज्यादा लोगों को एहतियात के तौर पर स्थानांतरित किया गया. NDRF और SDRF की टीमें तैनात की गई हैं. कूचबिहार के तुफानगंज और बक्सीरहाट में भी टीमें मौजूद हैं.
पश्चिम बंगाल के वन मंत्री और कुमारग्राम विधायक मनोज कुमार उरांव ने संकोश नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की. दार्जिलिंग सांसद राजू बिस्ता ने भी सोशल मीडिया पर अलर्ट जारी किया. अधिकारी बता रहे हैं कि पानी के बहाव की तीव्रता कुछ कम हुई है और स्थिति नियंत्रण में है. अलीपुरद्वार एसपी ने लोगों से घबराने की जरूरत नहीं बताई. भूटान से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है. संकोश नदी प्रणाली पर रेड अलर्ट जारी है. पानी के साथ मलबा, लकड़ी और मरी मछलियां आने की आशंका जताई गई है.
प्रशासन स्कूलों को राहत केंद्र बनाकर भोजन, पानी और अन्य सुविधाएं मुहैया करा रहा है. स्थिति की निगरानी जारी है. ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड तब होता है जब ग्लेशियर पिघलने से बनी झील का पानी अचानक निकल जाता है. इससे पहाड़ी इलाकों में तेजी से बाढ़ आ सकती है और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंच सकता है.