युवराज की मौत के मामले में Global Bharat TV की Ground Report, चौंकाने वाला सच आया सामने!

Global Bharat 20 Jan 2026 11:22: PM 2 Mins
युवराज की मौत के मामले में Global Bharat TV की Ground Report, चौंकाने वाला सच आया सामने!

नई दिल्ली: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है. 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत घने कोहरे, ठंडे पानी और लोहे की सरियों से भरे 30 फीट गहरे गड्ढे में कार गिरने से हो गई. यह घटना सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि निर्माण स्थल पर लापरवाही, सुरक्षा मानकों की अनदेखी और रेस्क्यू में देरी का नतीजा है. पूरी कहानी समझने के लिए Global Bharat TV की Ground report देखिए...

हादसे की पूरी कहानी

16 जनवरी की दरमियानी रात (16-17 जनवरी 2026) को युवराज गुरुग्राम से अपनी Maruti Suzuki Grand Vitara कार से नोएडा के घर (टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी) लौट रहे थे. घना कोहरा इतना था कि विजिबिलिटी लगभग शून्य हो गई. सड़क पर कोई रिफ्लेक्टर या चेतावनी संकेत नहीं थे. अचानक कार अनियंत्रित होकर एक निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में गिर गई.

कार पानी में डूब गई, लेकिन युवराज कार की छत पर खड़े होकर करीब 90 मिनट से 2 घंटे तक मदद की गुहार लगाते रहे. उन्होंने पिता राजकुमार मेहता से बार-बार कहा, "पापा, बचाओ... मैं मरना नहीं चाहता... प्लीज!". प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, युवराज मोबाइल की टॉर्च जलाकर चिल्लाता रहा, लेकिन ठंडा पानी, घना कोहरा और गड्ढे में लोहे की सरियां होने के डर से रेस्क्यू टीम (पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF) अंदर उतरने से हिचकिचाती रही.

एक डिलीवरी बॉय मोहिंदर ने कमर में रस्सी बांधकर पानी में कूदने की कोशिश की, लेकिन अंधेरा और कोहरा होने से सफल नहीं हो सका. बाद में NDRF की टीम ने क्रेन, सर्चलाइट और अन्य उपकरणों से युवराज को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना (Asphyxiation) और फेफड़ों में पानी भरना बताया गया.

लापरवाही के गुनाहगार कौन?

  • निर्माण कंपनी और बिल्डर: गड्ढा महीनों से खुला पड़ा था. कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड या लाइट नहीं थी. पुलिस ने MZ Wishtown के मालिक अभय कुमार को गिरफ्तार किया. उन्हें 1 दिन का रिमांड मिला, लेकिन अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं.
  • प्रशासन और नोएडा अथॉरिटी: स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले भी शिकायतें की गई थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. घटना के 3-4 दिन बाद भी कार गड्ढे से नहीं निकाली गई, जो प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है.
  • रेस्क्यू में देरी: टीमों ने जोखिम का हवाला दिया—"पानी ठंडा है, सरिया है, अंदर उतरना खतरनाक". मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए SIT गठित की है, जिसकी जांच जारी है.

परिवार और समाज में आक्रोश

युवराज गुरुग्राम की एक आईटी कंपनी में काम करते थे. हाइब्रिड मॉडल पर थे और परिवार का इकलौता कमाने वाला बेटा थे. पिता ने आरोप लगाया कि अगर थोड़ी हिम्मत दिखाई जाती तो जान बच सकती थी. अब सवाल उठ रहा है कि चार दिन बाद कार निकाली गई, लेकिन इंसाफ कब मिलेगा? यह सवाल अब सिर्फ परिवार का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है. क्या ऐसे 'मौत के गड्ढे' और लापरवाही भविष्य में भी बने रहेंगे? युवराज की मौत ने सिस्टम की पोल खोल दी है. अब सख्त कार्रवाई की बारी है.

Greater Noida Noida engineer death Yuvraj death

Description of the author

Recent News