नई दिल्ली: दुनिया आज भारत की प्राचीन मेडिकल विरासत को सलाम कर रही है. स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग स्थित रॉयल कॉलेज ऑफ सर्जन्स (RCSEd) में 'सर्जरी के जनक' महर्षि सुश्रुत की 90 किलोग्राम की कांस्य प्रतिमा स्थापित की गई है. यह प्रतिमा तमिलनाडु के स्वामिमलाई के पारंपरिक शिल्पकारों द्वारा बनाई गई है.
महर्षि सुश्रुत को दुनिया का पहला सर्जन और प्लास्टिक सर्जरी के जनक माना जाता है. लगभग 2600 वर्ष पहले उन्होंने सुश्रुत संहिता में 300 से अधिक सर्जरी प्रक्रियाओं और 124 से ज्यादा सर्जिकल उपकरणों का विस्तृत वर्णन किया था.
उन्होंने राइनोप्लास्टी (नाक की पुनर्निर्माण सर्जरी) जैसी उन्नत तकनीक की नींव रखी, जो आज की आधुनिक प्लास्टिक सर्जरी की आधारशिला बनी. FICCI की पूर्व अध्यक्ष और अपोलो हॉस्पिटल्स की जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ.
संगीता रेड्डी ने इस घटना पर खुशी जताते हुए एक्स पर लिखा, ''दुनिया आज उस विरासत का सम्मान कर रही है जो अपने समय से सदियों आगे थी.'' आयुष मंत्रालय ने इसे ‘भारत के लिए गर्व का पल’ बताया. मंत्रालय ने कहा कि सुश्रुत की यह सम्मान न सिर्फ एक महान चिकित्सक को श्रद्धांजलि है, बल्कि प्राचीन भारत की समृद्ध वैज्ञानिक और चिकित्सा विरासत की वैश्विक स्वीकृति भी है.
प्रतिमा चेरुवु फैमिली फाउंडेशन द्वारा दान की गई है. इसका अनावरण भारत के स्कॉटलैंड स्थित महावाणिज्य दूत ने किया. इस मौके पर प्रोफेसर चंद्रा चेरुवु द्वारा सुश्रुत की विरासत पर एक पुस्तक भी लॉन्च की गई और दो वार्षिक सर्जिकल स्कॉलरशिप की घोषणा की गई. सुश्रुत की विरासत अब दुनिया के सबसे पुराने और सम्मानित सर्जिकल संस्थान में स्थायी रूप से स्थापित हो गई है.