नई दिल्ली: शिवसेना (यूबीटी) के लिए मुश्किलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा. हाल ही में 6 लोकसभा सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में विलय के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी अब संसद भवन परिसर में अपना कार्यालय भी खोने की कगार पर पहुंच गई है. संसदीय नियमों के अनुसार, संसद भवन में अलग कार्यालय पाने के लिए किसी दल के पास कम से कम 5 सांसद जरूरी हैं.
यूबीटी के पास अब मात्र 4 सांसद ही बचे हैं. वर्तमान में शिवसेना (यूबीटी) का संसदीय दल कार्यालय संविधान सदन (पुराने संसद भवन) के कमरा नंबर 128-A में है. यह कमरा पहले अविभाजित शिवसेना के मूल कार्यालय (कमरा 128) के बगल में आवंटित किया गया था.
कैसे बिगड़ी स्थिति?
2022 में शिवसेना के विभाजन के बाद चुनाव आयोग ने फरवरी 2023 में एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना और तीर-कमान चुनाव चिन्ह आवंटित किया. इसके बाद शिंदे गुट को कमरा 128 मिल गया और यूबीटी को 128-A दिया गया. अब 6 सांसदों के और चले जाने से यूबीटी की संसदीय ताकत और कमजोर हो गई है.
परंपरा और नियम
संसद भवन परिसर में कार्यालय आवंटन मुख्य रूप से सांसदों की संख्या पर निर्भर करता है. 5 से कम सांसदों वाले दलों को आमतौर पर अलग कार्यालय नहीं दिया जाता और सर्वदलीय बैठकें भी उन्हें नहीं बुलाई जाती हैं. लोकसभा स्पीकर की औपचारिक मंजूरी के बाद यह प्रक्रिया पूरी हो सकती है.
यह घटनाक्रम उद्धव ठाकरे गुट के लिए लगातार दूसरा बड़ा झटका है. पार्टी पहले ही महाराष्ट्र में सियासी चुनौतियों का सामना कर रही है. सूत्रों के मुताबिक, स्पीकर कार्यालय जल्द ही इस मामले पर फैसला ले सकता है.