Halal vs Malhar certification: महाराष्ट्र के मंत्री की ''100% हिंदू'' मांस पर क्यों हो रहा विवाद?

Amanat Ansari 12 Mar 2025 08:42: PM 3 Mins
Halal vs Malhar certification: महाराष्ट्र के मंत्री की ''100% हिंदू'' मांस पर क्यों हो रहा विवाद?

नई दिल्ली: महाराष्ट्र में सरकार की नई मांस प्रमाणन पहल पर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है. विवाद तब शुरू हुआ जब महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने हिंदू मांस व्यापारियों के लिए 'मल्हार प्रमाणन' शुरू किया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि "100% हिंदू स्वामित्व वाली मटन दुकानें मिलावट से मुक्त हों." राणे ने कहा कि 'झटका' मटन बेचने वाले हिंदू दुकानदारों को यह प्रमाणन दिया जाएगा और हिंदू उपभोक्ताओं से आग्रह किया कि वे केवल प्रमाणित विक्रेताओं से ही मटन खरीदें. राणे की घोषणा के तुरंत बाद, विपक्ष ने इस कदम की आलोचना की और आरोप लगाया कि इससे समाज विभाजित होगा.

कांग्रेस विधायक नाना पटोले ने राणे की टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि एक मंत्री को इस तरह के विभाजनकारी बयान नहीं देने चाहिए. पटोले ने एएनआई से कहा, "एक मंत्री इस तरह की बात नहीं कर सकता. इससे यह संदेश जाता है कि मुख्यमंत्री का अपने मंत्रियों पर कोई नियंत्रण नहीं है. अगर कोई मंत्री दो धर्मों के बीच संघर्ष को भड़का रहा है, तो सीएम को कार्रवाई करनी चाहिए."

कांग्रेस नेता असलम शेख ने इस कदम को असंवैधानिक करार दिया. उन्होंने कहा, "अगर यह सरकार या नितेश राणे मीट के कारोबार में उतरना चाहते हैं, तो यह अच्छी बात है. हमारा संविधान हमें कुछ भी करने, कुछ भी खाने की आजादी देता है, लेकिन यह कहना कि एक ही व्यक्ति एक तरह का काम करेगा, हमारे संविधान के अनुरूप नहीं है." राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार गुट) के विधायक जितेंद्र आव्हाड ने भी टिप्पणियों की आलोचना की, खासकर रमजान के पवित्र महीने के दौरान. उन्होंने कहा, "जब राज्य में सब कुछ सुचारू रूप से चल रहा है, तो भाजपा सरकार हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को हवा देने की कोशिश करती है." उन्होंने अवैध लाउडस्पीकरों पर बहस के पीछे राजनीतिक मकसद पर भी सवाल उठाया और कहा, "जहां जरूरी हो, वहां कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन इसे राजनीतिक मुद्दा क्यों बनाया जाए?"

उधर आलोचना के बावजूद, भाजपा विधायक संजय उपाध्याय ने राणे की प्रमाणन पहल का बचाव करते हुए तर्क दिया कि 'हलाल' मांस स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करता है. "मुझे इस बात से कोई दिक्कत नहीं है कि लोग क्या खाना पसंद करते हैं, लेकिन अगर किसी को गुमराह किया जा रहा है, तो इस पर आपत्ति होनी चाहिए. हलाल प्रक्रिया के दौरान उत्पादित रसायन शरीर के लिए हानिकारक होते हैं. मैं इस मामले में नितेश राणे का समर्थन करता हूं - चिकन और मटन की दुकानों के पास उचित लाइसेंस होना चाहिए."

इस बीच, राणे ने अपनी पहल को सही ठहराते हुए दावा किया कि प्रमाणन से हिंदुओं को हिंदू समुदाय के सदस्यों द्वारा संचालित "सही मटन की दुकानों" की पहचान करने और कोई मिलावट न होने की पुष्टि करने में मदद मिलेगी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लॉन्च की घोषणा करते हुए उन्होंने लिखा, "आज, हमने महाराष्ट्र में हिंदू समुदाय के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम उठाया है. मल्हार प्रमाणन 100% हिंदू स्वामित्व वाली मटन दुकानों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया है, जो मिलावट से मुक्त है."

उन्होंने लोगों से प्रमाणित विक्रेताओं को प्राथमिकता देने और अप्रमाणित दुकानों से खरीदारी करने से बचने का आग्रह किया. राणे ने कहा, "मैं सभी से मल्हार प्रमाणन का उपयोग करने और इसके बिना जगहों से मटन न खरीदने की अपील करता हूं. यह पहल हिंदू युवाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी."

क्या है मल्हार प्रमाणन?

सरकारी वेबसाइट के अनुसार, मल्हार प्रमाणन झटका मटन और चिकन विक्रेताओं के लिए है. वेबसाइट पर कहा गया है, "यह सुनिश्चित करता है कि हिंदू धार्मिक परंपराओं के अनुसार बलि दिया जाने वाला बकरा और भेड़ का मांस ताजा, स्वच्छ, लार से दूषित न हो और किसी अन्य जानवर के मांस के साथ न मिला हो." " वेबसाइट पर कहा गया है कि यह मांस विशेष रूप से हिंदू खटिक समुदाय के विक्रेताओं के माध्यम से उपलब्ध है. इसलिए, हम सभी को मल्हार द्वारा प्रमाणित विक्रेताओं से ही मटन खरीदने के लिए प्रोत्साहित करते हैं."

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