कपिल सिब्बल को 'सुप्रीम फटकार...' ममता बनर्जी को बचाते-बचाते खुद फंस गए!

Amanat Ansari 25 Mar 2026 01:49: PM 2 Mins
कपिल सिब्बल को 'सुप्रीम फटकार...' ममता बनर्जी को बचाते-बचाते खुद फंस गए!

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल और जजों के बीच काफी तीखी बहस हुई. मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका से जुड़ा था, जिसमें पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कोलकाता में आई-पैक (Indian Political Action Committee) नाम की एक राजनीतिक सलाहकार फर्म पर छापेमारी के दौरान ED अधिकारियों को रोका और बाधा डाली.

क्या था पूरा विवाद?

8 जनवरी को ED ने कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आई-पैक के दफ्तर समेत कई जगहों पर छापा मारा था. ED का आरोप है कि इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य के कुछ अधिकारियों ने उनके अधिकारियों को काम करने से रोका. इसके जवाब में ED और उसके कुछ अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच की मांग की है. सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारी की बेंच ने सवाल उठाया कि ED के अधिकारियों के साथ हुई कथित बाधा के बारे में राज्य सरकार क्या कहती है.

कपिल सिब्बल और कोर्ट के बीच हुई बहस

ममता बनर्जी की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि कोर्ट पहले से ही कुछ बातें तय मानकर चल रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि अभी तो सिर्फ आरोप हैं, कोई साबित तथ्य नहीं. जब बेंच ने पूछा कि अगर मुख्यमंत्री या राज्य सरकार जांच में दखल दे रही है तो ED को क्या करना चाहिए, तो सिब्बल ने जवाब दिया कि कोर्ट इस तरह की टिप्पणी करके यह मान रही है कि मुख्यमंत्री ने गलत किया है. उन्होंने कहा– ''यह मत कहिए कि हम गुस्से में हैं...''

इस पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने साफ कहा, ''हम नाराज नहीं हैं. सवाल पूछना नाराज होना नहीं होता. आप हमें गुस्से में होने का आरोप मत लगाइए.'' बेंच ने आगे स्पष्ट किया कि वे कोई पक्ष नहीं ले रही हैं. उन्होंने कहा कि हर आरोप कुछ न कुछ तथ्यों पर आधारित होता है. अगर कोई तथ्य ही नहीं है तो जांच की जरूरत ही क्या है? इसलिए वे सीबीआई जांच चाहते हैं.

सिब्बल की मुख्य दलीलें

  • याचिका दायर करने वाले ED अधिकारी ने स्पष्ट रूप से यह नहीं बताया कि उनका कौन सा मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 32) टूटा है.
  • सिर्फ किसी जांच एजेंसी के अधिकारी होने के कारण कोई भी व्यक्ति अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए सीधे सुप्रीम कोर्ट नहीं आ सकता.
  • अगर कोई पुलिस या जांच अधिकारी के काम में बाधा डाले तो उसके खिलाफ सामान्य कानूनी कार्रवाई हो सकती है, लेकिन इससे मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं माना जाता.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि याचिका में ED अधिकारियों के व्यक्तिगत अधिकारों पर भी ध्यान देना चाहिए. उन्होंने सिब्बल से कहा कि अगर सिर्फ ''ED, ED'' पर ही फोकस करते रहेंगे और उन अधिकारियों को भूल जाएंगे जिनके साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार हुआ, तो मुद्दे से भटक सकते हैं.

पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से सीनियर एडवोकेट कल्याण बनर्जी ने भी दलील दी कि सीबीआई जांच के लिए राज्य की सहमति जरूरी होती है. सुनवाई बिना किसी अंतिम फैसले के खत्म हुई. अब इस मामले की अगली सुनवाई 14 अप्रैल को होगी.
संक्षेप में, मामला ED की छापेमारी में कथित बाधा डालने का है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से सवाल किए और कपिल सिब्बल के साथ थोड़ी नोक-झोंक भी हुई, लेकिन कोर्ट ने साफ किया कि वे नाराज नहीं हैं, सिर्फ सवाल पूछ रहे हैं.

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