मृत केस में जान फूंकने की कोशिश! दिवंगत सांसद के परिवार पर ED की कार्रवाई पर हाईकोर्ट का कड़ा वार, पूरी ECIR रद्द

Amanat Ansari 21 Aug 2026 04:41 PM 1 Mins
मृत केस में जान फूंकने की कोशिश! दिवंगत सांसद के परिवार पर ED की कार्रवाई पर हाईकोर्ट का कड़ा वार, पूरी ECIR रद्द

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक मनी लॉन्ड्रिंग मामले को जबरन जिंदा रखने की कोशिश के लिए कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने ED की कार्रवाई को “गैर-कानूनी, तर्कहीन और शक्ति का गलत इस्तेमाल” करार देते हुए संबंधित पूरी कार्यवाही को रद्द कर दिया. यह मामला दिवंगत राज्यसभा सांसद और अरिस्टो फार्मास्युटिकल्स के संस्थापक डॉ. महेंद्र प्रसाद के परिवार से जुड़ा है. उनके निधन के बाद परिवार में 4,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था.

साल 2021 में एक FIR दर्ज हुई थी, जिसमें आरोप था कि प्रसाद की दिवंगत पत्नी सतुला देवी के जाली हस्ताक्षर कर शेयर ट्रांसफर और बैंक दस्तावेज तैयार किए गए. इसी FIR के आधार पर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग का ECIR दर्ज किया था. लेकिन आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट में साफ हुआ कि हस्ताक्षर असली थे और कोई अपराध नहीं हुआ. जून 2025 में मजिस्ट्रेट अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर केस बंद कर दिया.

इसके ठीक दो महीने बाद अगस्त 2025 में ED ने एक नया पैंतरा चला. एजेंसी ने 6 साल पुरानी (2019 की) एक अन्य FIR को ऐडेंडम के जरिए ECIR में जोड़ दिया. यह पुरानी FIR सतुला देवी को बंधक बनाने और जेवर हटाने के आरोपों से संबंधित थी. दिलचस्प बात यह है कि ED को इस 2019 वाली FIR की जानकारी कम से कम 2023 से ही थी, लेकिन उसने तब तक कोई कार्रवाई नहीं की जब तक मुख्य FIR पूरी तरह खारिज नहीं हो गई.

18 अगस्त को दिए गए फैसले में जस्टिस अनीश दयाल ने साफ कहा कि ED “एक ऐसी कार्यवाही में जान फूंकने की कोशिश कर रही थी जिसका बुनियादी कानूनी आधार ही खत्म हो चुका था.” कोर्ट ने टिप्पणी की कि एजेंसी का व्यवहार साफ बताता है कि वह मौजूदा ECIR को बनाए रखना चाहती थी ताकि PMLA के तहत तलाशी, जब्ती, फ्रीजिंग और अटैचमेंट जैसी सख्त शक्तियां उसके पास बनी रहें.

अदालत ने ED द्वारा जारी ऐडेंडम को अधिकार क्षेत्र से बाहर और अवैध घोषित कर दिया तथा इस आधार पर दर्ज पूरी ECIR कार्यवाही को रद्द कर दिया. साथ ही कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण व्यवस्था भी दी कि हाईकोर्ट्स के पास PMLA के तहत ED की सिविल कार्यवाहियों (संपत्ति फ्रीज, तलाशी, जब्ती आदि) को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं पर सुनवाई का पूरा अधिकार है. यह फैसला ED की मनमानी पर लगाम लगाने वाला एक अहम फैसला माना जा रहा है.

Enforcement Directorate Money Laundering Case King Mahindra Family PMLA Case

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