कोलकाता: पश्चिम बंगाल क्या भारत का हिस्सा नहीं है? क्या पश्चिम बंगाल में हिन्दुओं को त्यौहार मनाने का अधिकार नहीं है? क्या अब हिन्दू ममता राज में सुरक्षित नहीं हैं और वहां केवल समुदाय विशेष के लोग ही रह सकते हैं? ऐसे ही तमाम सवाल पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर खड़े हो रहे हैं, वजह है रामनवमी.
पश्चिम बंगाल में रामनवमी पर घमासान क्यों?
नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है, और पश्चिम बंगाल में हमेशा से ही माता की पूजा का विशेष महत्व रहा है. लेकिन इस बार रामनवमी पर हिन्दुओं को शोभायात्रा निकालने की अनुमति ममता बनर्जी की पुलिस नहीं दे रही है. इसी बात पर ये सारा विवाद खड़ा हुआ है.
पुलिस ने नहीं दी शोभायात्रा निकालने की अनुमति
दो संगठनों ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें कहा गया था कि हावड़ा पुलिस ने रामनवमी के अवसर पर शोभायात्रा निकालने की अनुमति नहीं है. जिस पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने साफ आदेश जारी किया है. कोर्ट का कहना है कि ‘महज कानून-व्यवस्था की चिंता से धार्मिक आयोजनों पर रोक लगाना ठीक नहीं है’
न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष की पीठ ने ‘अंजनी पुत्र सेना’ और ‘विश्व हिन्दू परिषद’ की याचिका पर सुनवाई की थी, जिसमें पुलिस की तरफ से शोभायात्रा ना देने की बात पर राज्य सरकार की तरफ से कह गया था कि “राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पिछले वर्षों में रामनवमी के दौरान हावड़ा के कुछ इलाकों में हिंसा हुई थी। इसी कारण पुलिस ने एहतियात के तौर पर अनुमति नहीं दी।”
जिस पर न्यायमूर्ति घोष ने फटकार लागाई और कहा कि “अगर दुर्गा पूजा के दौरान कहीं झगड़ा हो जाए, तो क्या पूजा बंद कर दी जाती है? क्या उस इलाके में हर दिन गड़बड़ी होती है?”
जिसके बाद कोर्ट ने शोभा यात्रा निकालने की अनुमति तो दे दी, लेकिन इसके ही कुछ शर्तें भी इन संगठनों के आगे रख दीं, कोर्ट का कहना है कि दोनों संगठनों के मिलाकर ज्यादा से ज्यादा 1 हजार लोग ही जुलूस में हिस्सा लेंगे, सभी लोगों की पहचान और नाम की सूची पुलिस को देनी होगी. हर प्रतिभागी के लिए पहचानपत्र रखना अनिवार्य होगा, शोभायात्रा के दौरान धातु के हथियार नहीं रखे जा सकेंगे. इसके साथ ही ‘अंजनी पुत्र सेना’ सुबह 8:30 बजे से दोपहर एक बजे तक शोभायात्रा निकालेगी। ‘विश्व हिन्दू परिषद’ दोपहर तीन बजे से शाम छह बजे तक अपनी शोभायात्रा निकालेगी.