मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यूपी मदरसा एक्ट (UP Madrasa Act) की संवैधानिकता को बरकरार रखते हुए बड़ा फैसला सुनाया है और इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट संविधान के मौलिक ढांचे के खिलाफ है और मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का दाखिला सामान्य स्कूल में कराया जाए.
फैसला सुनाते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा कि मदरसे में मजहबी शिक्षा भी दी जाती है, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा ही है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मदरसा बोर्ड को फाजिल, कामिल जैसी डिग्री देने का अधिकार दिया गया है, यह यूजीसी एक्ट के खिलाफ है और इसे हटा देना चाहिए. डिग्री देना असंवैधानिक और बाकी एक्ट संवैधानिक है.
मदरसा बोर्ड में आमतौर पर पढ़ाई को कई स्तरों में बांटा गया है. अधिकांश मदरसों में विभिन्न स्तरों पर शिक्षा प्रदान की जाती है, जो कि कक्षा 1 से लेकर स्नातक (ग्रेजुएशन) स्तर तक हो सकती है. इसी में से फाजिल, कामिल जैसी डिग्री जो मदरसा बोर्ड द्वारा दी जाती है, उसे सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी एक्ट के खिलाफ बताया है. आईए जानते हैं मदरसा बोर्ड के तहत कहां तक पढ़ाई की जाती है.
इब्तिदाई (प्राथमिक) स्तर
मुतवस्सित (माध्यमिक) स्तर
फौकानिया (हाई स्कूल) स्तर
आलिम (इंटरमीडिएट) स्तर
फाज़िल और कामिल (स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर)
साथ ही कई मदरसा बोर्ड अपने अनुसार अतिरिक्त स्तर भी रखते हैं, जो अलग-अलग मदरसों में भिन्न हो सकते हैं. कुछ मदरसों में व्यावसायिक शिक्षा और कंप्यूटर शिक्षा को भी शामिल किया गया है ताकि छात्रों को रोजगार के अवसर मिल सकें. इस प्रकार, अधिकांश मदरसा बोर्ड कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 या उससे आगे स्नातक स्तर तक शिक्षा प्रदान करते हैं.
साथ ही कुछ मदरसों में "काजी" की डिग्री भी दी जाती है. दरअसल, काजी एक इस्लामी न्यायाधीश होता है जो इस्लामी कानून (शरीयत) के तहत न्याय प्रदान करने का काम करता है. काजी का मुख्य कार्य धार्मिक नियमों और शरीयत कानून के अनुसार विवादों को सुलझाना, न्याय करना और लोगों का मार्गदर्शन करना होता है. काजी का पद इस्लामिक समाज में बहुत सम्मानित माना जाता है और उनके निर्णय इस्लामी नियमों के अनुरूप होते हैं.