मदरसा बोर्ड में कहां तक होती है पढ़ाई, सुप्रीम कोर्ट ने मदरसे की किस डिग्री को किया अमान्य घोषित?

Amanat Ansari 05 Nov 2024 08:07: PM 2 Mins
मदरसा बोर्ड में कहां तक होती है पढ़ाई, सुप्रीम कोर्ट ने मदरसे की किस डिग्री को किया अमान्य घोषित?

मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने यूपी मदरसा एक्ट (UP Madrasa Act) की संवैधानिकता को बरकरार रखते हुए बड़ा फैसला सुनाया है और इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें कहा गया था कि यूपी मदरसा बोर्ड एक्ट संविधान के मौलिक ढांचे के खिलाफ है और मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों का दाखिला सामान्य स्कूल में कराया जाए.

फैसला सुनाते हुए सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ (CJI DY Chandrachud) के नेतृत्व वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा कि मदरसे में मजहबी शिक्षा भी दी जाती है, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य शिक्षा ही है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मदरसा बोर्ड को फाजिल, कामिल जैसी डिग्री देने का अधिकार दिया गया है, यह यूजीसी एक्ट के खिलाफ है और इसे हटा देना चाहिए. डिग्री देना असंवैधानिक और बाकी एक्ट संवैधानिक है.

मदरसा बोर्ड में आमतौर पर पढ़ाई को कई स्तरों में बांटा गया है. अधिकांश मदरसों में विभिन्न स्तरों पर शिक्षा प्रदान की जाती है, जो कि कक्षा 1 से लेकर स्नातक (ग्रेजुएशन) स्तर तक हो सकती है. इसी में से फाजिल, कामिल जैसी डिग्री जो मदरसा बोर्ड द्वारा दी जाती है, उसे सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी एक्ट के खिलाफ बताया है. आईए जानते हैं मदरसा बोर्ड के तहत कहां तक पढ़ाई की जाती है.

इब्तिदाई (प्राथमिक) स्तर

  • इसमें कक्षा 1 से लेकर कक्षा 5 तक की पढ़ाई होती है.
  • इस स्तर पर बच्चों को बुनियादी धार्मिक शिक्षा दी जाती है, जैसे कि कुरान पढ़ना, नमाज, हदीस और अरबी भाषा की शुरुआती जानकारी.

मुतवस्सित (माध्यमिक) स्तर

  • कक्षा 6 से कक्षा 8 तक की पढ़ाई को शामिल किया जाता है.
  • इसमें अरबी भाषा, उर्दू, इस्लामी अध्ययन के साथ-साथ गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की भी शिक्षा दी जाती है.

फौकानिया (हाई स्कूल) स्तर

  • कक्षा 9 और कक्षा 10 के बराबर होता है.
  • इस स्तर पर धार्मिक अध्ययन के साथ आधुनिक विषयों को भी पढ़ाया जाता है. कुछ मदरसा बोर्ड हाई स्कूल स्तर पर प्रमाणपत्र भी प्रदान करते हैं, जो माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के समकक्ष माने जाते हैं.

आलिम (इंटरमीडिएट) स्तर

  • कक्षा 11 और कक्षा 12 के बराबर होता है.
  • इस स्तर पर छात्रों को इस्लामी कानून, हदीस, अरबी साहित्य, उर्दू साहित्य के साथ-साथ अन्य आधुनिक विषयों की पढ़ाई कराई जाती है. आलिम स्तर का प्रमाणपत्र अक्सर हायर सेकेंडरी बोर्ड (कक्षा 12) के बराबर माना जाता है.

फाज़िल और कामिल (स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर)

  • कुछ मदरसों में आलिम के बाद फाज़िल और कामिल की पढ़ाई होती है, जो स्नातक (ग्रेजुएशन) और स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएशन) के समकक्ष होते हैं.
    इसमें छात्रों को गहराई से धार्मिक विषयों, जैसे कि तफसीर (कुरान की व्याख्या), फिकह (इस्लामी कानून), हदीस और अरबी साहित्य का अध्ययन कराया जाता है.

साथ ही कई मदरसा बोर्ड अपने अनुसार अतिरिक्त स्तर भी रखते हैं, जो अलग-अलग मदरसों में भिन्न हो सकते हैं. कुछ मदरसों में व्यावसायिक शिक्षा और कंप्यूटर शिक्षा को भी शामिल किया गया है ताकि छात्रों को रोजगार के अवसर मिल सकें. इस प्रकार, अधिकांश मदरसा बोर्ड कक्षा 1 से लेकर कक्षा 12 या उससे आगे स्नातक स्तर तक शिक्षा प्रदान करते हैं.

साथ ही कुछ मदरसों में "काजी" की डिग्री भी दी जाती है. दरअसल, काजी एक इस्लामी न्यायाधीश होता है जो इस्लामी कानून (शरीयत) के तहत न्याय प्रदान करने का काम करता है. काजी का मुख्य कार्य धार्मिक नियमों और शरीयत कानून के अनुसार विवादों को सुलझाना, न्याय करना और लोगों का मार्गदर्शन करना होता है. काजी का पद इस्लामिक समाज में बहुत सम्मानित माना जाता है और उनके निर्णय इस्लामी नियमों के अनुरूप होते हैं.

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