नई दिल्ली: सुहागरात एक ऐसा शब्द है, जिसे लेकर शर्मिंदगी और समझदारी दोनों होती है, लेकिन एक टीचर ऐसा अय्याश निकला, जिसने खुले क्लास में लड़के-लड़कियों को बताया कि मुस्लिम लड़कियां सुहागरात कैसे मनाती हैं, मुस्लिम दूल्हा-दूल्हन पहली रात क्या करते हैं, ये न सिर्फ वो बताता बल्कि इसके चित्र भी ब्लैकबोर्ड पर बनाता, जिसे सुनकर बच्चे शर्म से अपना सिर झुका लेते, घर जाकर मां-बाप को भी नहीं बता पाते, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ कि उस टीचर की पोल खुल गई.
पूरा मामला बिहार के बेतिया जिले के मंझरिया शेख पंचायत का है, वहां के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक गेनालाल शर्मा के अंदर बिल्कुल भी शर्म लिहाज नहीं थी, स्कूल 8वीं तक था, तो बच्चे-बच्चियां सब नाबालिग थे, जीव विज्ञान के किताब में भी प्रजनन इतने विस्तार से नहीं पढ़ाना था, जितना ज्ञान गेनालाल बच्चों को दे रहे थे, स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियां बताती हैं वो पढ़ाते कम और मस्ती-मजाक ज्यादा करते हैं, किताब से बात शुरू करते हैं, फिर चित्र बनाकर समझाने लगते हैं, एक बार उन्होंने ये भी बताया कि मुस्लिम लड़कियां सुहागरात कैसे मनाती हैं.
मुसलमानों के बीच हिंदुओं को लेकर और हिंदुओं के बीच मुसलमानों को लेकर कई ऐसी झूठी बातें बताई जाती हैं, जिसका सच से कोई सरोकार नहीं होता. इसीलिए एक हिंदू टीचर ने जब मुस्लिम लड़कियों के बारे में बताना शुरू किया तो बच्चे भी चौंक गए. शायद आप ये जानकर दंग रह जाएंगे कि कई देशों में लड़कियों का खतना भी होता है.
मिस्त्र में आमतौर पर 9 से 12 साल की उम्र में ही लड़कियों का खतना कर दिया जाता है, प्राइवेट पार्ट के एक खास हिस्से क्लिटोरिस को अलग कर दिया जाता है, ताकि लड़कियों में सेक्स की इच्छा ज्यादा न हो, हालांकि मुस्लिम धर्म के कई जानकार कहते हैं ये स्त्रियों की भावना के खिलाफ है, जबकि खतना के पक्षधर इस बात को मानते हैं कि बीवी अपने शौहर को छोड़कर कहीं और न जाए, इसके लिए ये जरूरी है. कुछ ऐसा ही हाल दक्षिण अफ्रीकी देश फ्रेंच गुयाना और माली का भी है, वहां भी ज्यादातर महिलाओं को खतना जैसे खतरनाक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, लेकिन टीचर ने इन बातों को नहीं बल्कि सुहागरात से जुड़ी कुछ कहानियां सुनाई, कैसे कमरे में बीवी अपने शौहर के सामने दूध का गिलास लेकर जाती है, फिर पहली रात कैसे गुजरती है.
ये बातें सार्वजनिक तौर पर नहीं होनी चाहिए, लेकिन टीचर ही जब कामवासना से भरा हो तो क्या करेगा, इस बात की भनक जैसे ही लड़कियों के अभिभावकों को लगी, तुरंत स्कूल को घेर लिया, विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, वो लगातार ये पूछने लगे कि ये टीचर है या लफुआ, स्कूल में बच्चियों को ज्ञान के लिए भेजते हैं या फिर सेक्स की शिक्षा के लिए, सेक्स एजुकेशन जरूरी है लेकिन उसका भी एक तरीका होना चाहिए. आरोपी शिक्षक को सस्पेंड करने की मांग को लेकर गांववालों ने घंटों नारेबाजी की.
नतीजा प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हफ़िजूलरह्मान स्कूल जाते हैं, छात्र-छात्राओं से बात करते हैं, और कहते हैं शिक्षक गेनालाल शर्मा पर लगे आरोप सही पाए गए हैं, किसी भी सूरत में ऐसे टीचर को नहीं बख्शा जाएगा, इनका वेतन रोक दिया गया है, इन्हें सस्पेंड करने की सिफारिश की गई है. 12 दिसंबर 2024 को अमर उजाला इसे अपनी रिपोर्ट में प्रकाशित करता है, लेकिन मीडिया में ये चर्चा का विषय लंबे वक्त बाद बनती है.