तेहरान/वशिंगटन: पहली बार अमेरिकी सेना ने दो ऐसे वीडियो जारी किए हैं, जिसने ईरान की धड़कनें बढ़ा दी है, पहला वीडियो खुद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया है, जबकि दूसरा वीडियो अमेरिकी सेना ने जारी किया है...पहले वीडियो में ईरानी जहाज पर अमेरिकी जवान फायरिंग करते दिख रहे हैं, जबकि दूसरे वीडियो में हेलीकॉप्टर से कमांडो एक शिप पर कूदते दिख रहे हैं, और उसके बाद ये एक ईरानी जहाज को अपने कब्जे में ले लेते हैं.
ये इस जंग में पहला मौका था, जब ईरानी जहाज इस तरीके से पकड़ा गया, वो भी चीन से आ रहा था.. जिस पर चीन बेहद खफा है, अब उस पर सवार क्रू मेंबर्स क्या अब डील में बड़ी चुनौती बनेंगे, क्योंकि इससे पहले जब अमेरिकी पायलट ईरान की धरती पर फंसा था तो जानकार कह रहे थे अमेरिका अब कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन अमेरिका ने बड़ी चालाकी से अपने पायलट को निकाल लिया, पर ईरान के लिए ये आसान नहीं होगा...इसीलिए उसने पहले बदले की कसम खाई, और उसके बाद ओमान की खाड़ी में कई अमेरिकी जहाजों पर ईरानी सेना ने ड्रोन बरसाने शुरू कर दिए..जो ये बता रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच अब समझौता होना आसान नहीं है...
पाकिस्तान की चाल भी अब कामयाब नहीं होने वाली, वो जो समझौते करवाकर अमेरिका से मदद लेने की उम्मीद में था, उसे भी बड़ा झटका लगने वाला है, और उसका भी धैर्य अब जवाब देने लगा है, शायद इसीलिए इस डील में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहे शहबाज शरीफ और असीम मुनीर ने अब अमेरिका के कहने पर प्रस्ताव बनवाकर ईरान को भेज दिया है, अपने यहां सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करवा दी है, ताकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी प्रतिनिधि अगर वहां पहुंचें तो दूसरे दौर की बातचीत हो सके...लेकिन इन सबके बीच एक चौंकाने वाली बात ये भी है कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जंग के बीच सऊदी अरब जा पहुंचे हैं..।और उनकी जो तस्वीर सामने आई है, वो कई बड़े इशारा करती है...
सऊदी अरब के विदेश मंत्री, ऊर्जा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल मुलाकात करते हैं...सऊदी के विदेश मंत्री फैजल बिन फरहान अल सऊद के साथ कई मुद्दों पर उनकी चर्चा होत है. दोनों देशों के रिश्तों, मिडिल ईस्ट में बने हालात पर काफी देर तक मंथन होता है.....तो सवाल ये उठ रहा है कि क्या भारत अब शांतिवार्ता में बड़ी भूमिका निभाने वाला है, क्योंकि भारत की ओर कई बड़े दिग्गज उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं, उसकी वजह ईरान और अमेरिका दोनों देशों से भारत के दोस्ताना संबंध है, हालांकि ईरान ने उसके बाद भी बीते दिनों भारतीय जहाजों पर फायरिंग कर दी, जिसे लेकर भारत ने कड़ा विरोध जताया, उसके बाद होर्मुज के रास्ते दोबारा से भारत के लिए खुल गए, लेकिन ये होर्मुज बंद होने और खुलने की कहानी कब तक चलेगी, आम जनता को हो रही दिक्कतों का ध्यान कौन रखेगा.
ईरान और अमेरिका के चक्कर में दुनिया के साथ जो हो रहा है, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा, क्या ट्रंप ने पाकिस्तान जैसे देश पर शांतिवार्ता की जिम्मेदारी सौंपकर बड़ी गलती कर दी, ये बड़ा सवाल है, क्योंकि जिस परमाणु की लड़ाई अभी अमेरिका ईरान से लड़ रहा है, उस परमाणु तकनीक और परमाणु को दुनियाभर के कई देशों तक एक दौर में पाकिस्तान ने चोरी छिपे पहुंचाया था, ऐसे आरोप भी लगाए जाते हैं, और पाकिस्तान तो दुनियाभर में अशांति फैलाता रहा है, फिर वो शांति कैसे करवा सकता है, ये सवाल पहले दौर की बातचीत में भी उठे थे, और अब जब जंग दोबारा बढ़ने की स्थिति में दिख रही है, तब भी उठने लगे हैं...