अमेरिका में वाइन बंट रही है, भारत में मिठाई बंट रही है, जीते डोनाल्ड ट्रंप है, फिर खुश मोदी, नेतन्याहू, पुतिन और सऊदी के सुल्तान क्यों हैं? क्या दुनिया के हालात में 360 डिग्री बदलाव आने वाला है? ट्रंप की जीत से भारत को ऐसा कौन सा फायदा होने वाला है कि कई लोग खुश हो रहे हैं, जबकि यहां भी कई लोग मातम मनाने में लगे हैं. ट्रंप ने जीत के साथ ही ये स्पष्ट कर दिया है कि अगले 30 दिनों में वो तीन बड़े फैसले लेने वाले हैं.
अब पहले फैसले पर गौर करें तो इससे भारत को फायदा ये होगा कि सीएए और एनआरसी वाला कानून जो मोदी सरकार लाई है, उस पर भी ट्रंप मोदी का साथ देंगे. यहां तक कि रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के अवैध घुसपैठ पर भी मोदी सरकार की नीतियों का ट्रंप खुलकर समर्थन कर सकते हैं, क्योंकि ट्रंप सिर्फ अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं बल्कि मोदी के दोस्त भी हैं. इसीलिए जीत के तुरंत बाद मोदी जो बधाई देते हैं, उसमें भी दोस्त शब्द का जिक्र करते हैं. लिखते हैं मेरे दोस्त को बधाई.
हालांकि वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए H1B वीजा का जो फैसला ट्रंप ने लिया था, उस पर थोड़ी माथापच्ची भारत सरकार को करनी पड़ सकती है, लेकिन ट्रंप की जीत भारत में निवेश से लेकर रोजगार और विश्वगुरू तक के बनने में भारत के लिए फायदेमंद होगी. क्योंकि ट्रंप हमेशा से चीन विरोधी रहे हैं, और भारत इस वक्त चीन से आगे निकलने की जिस दौड़ में है, उसे ट्रंप की जीत के बाद अच्छी रफ्तार मिल सकती है, पर ट्रंप की कुछ नीतियां ऐसी होती है जिस पर सवाल उठते हैं. जैसे वो अचानक नॉर्थ कोरिया चले गए तो कई लोग नाराज हो गए. ऐसे में ये समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर ट्रंप की जीत से दुनिया के कौन से बड़े देश खुश हैं और कौन से नाराज है, और उसके पीछे की वजह क्या है.
ट्रंप की जीत से खुश देश
लेकिन पाकिस्तान से लेकर चीन और ईरान तक ट्रंप की जीत से नाखुश है. यहां तक कि बांग्लादेश की युनूस सरकार के समर्थक भी मातम मनाने लगे हैं, क्योंकि ट्रंप की जीत का मतलब है शेख हसीना की बांग्लादेश में वापसी होने के आसार, इसीलिए शेख हसीना बकायदा ट्रंप को बधाई देती हैं, जिसे देखकर खालिदा जिया और उनके समर्थकों की धड़कनें बढ़ जाती है, यही हाल पाकिस्तान का भी है, जहां शहबाज शरीफ को इस बात का डर सता रहा है कि कभी भी भाई नवाज की तरह जेल जाना पड़ सकता है, जबकि इमरान खान के समर्थक खुशी मना रहे हैं, क्योंकि ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान न सिर्फ इमरान खान से मुलाकात की थी, बल्कि इमरान की पार्टी भी इन्हें पसंद करती है.
लेकिन कहते हैं ट्रंप को समझना थोड़ा मुश्किल भी है, एक तरफ इमरान के समर्थक अब ये सोच रहे हैं कि हमारे नेता जेल से बाहर आ सकते हैं, तो वहीं दूसरी तरफ ट्रंप ने अपने कार्यकाल में पाकिस्तान को मिलने वाली 1.3 बिलियन डॉलर की आर्थिक मदद रोकने का फैसला लिया था, जिसे लेकर पाकिस्तान में आक्रोश बढ़ गया था. ये सच बात है कि ट्रंप राष्ट्रपति अमेरिका के बने हैं, लेकिन अमेरिका का प्रभाव जैसे बाकी देशों पर रहता है, वो साफ बताता है हर जगह कुछ न कुछ असर पड़ने वाला है.