उन्नाव: ये कहानी एक बुजुर्ग दंपत्ति की है, जो अचानक बिछड़ जाते हैं. एक दूसरे की तलाश में दर दर भटकते हैं, लेकिन कोई खबर नहीं मिलती. पर कुदरत को उनका दूर रहना पसंद नहीं था. इसलिए दोनों की ऐसी मुलाकात करवाई कि हर कोई हैरान रह गया. पति कहता है... मेरी पत्नी एक दिन घर से निकली, फिर कभी वापस नहीं लौटीं. मैं लगातार अपनी पत्नी को तलाश करता रहा, हर जगह तलाश किया, लेकिन वो नहीं मिली.
निराशा ने मुझे घेर लिया था, इतना परेशान था कि खुद भी बीमार पड़ गया. आंखों में सम्स्या होने लगी थी. इलाज कराने जिला अस्पताल पहुंचा, जहां मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया. जब आंख की पट्टी खोली तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा. बगल वाले बेड पर मेरी पत्नी भर्ती थी. अब ना आंखों के ऑपरेशन की चिंता है, ना शरीर की किसी और तकलीफ की. अब हर दर्द भूल कर अपनी पत्नी क देखभाल कर रहा हूं.
ये शब्द हैं एक ऐसे इंसान के हैं जो अपनी पत्नी क तलाश में दर-दर भटक रहा था. उत्तर प्रदेश के उन्नाव की कवटा तालाब बस्ती में रहते हैं राकेश कुमार. अपनी पत्नी के मिलने और बिछड़ने की कहानी बताते हुए राकेश की आंखें भी नम हो जाती हैं. दरअसल करीब एक महीना पहले राकेश की पत्नी शांति देवी अचानक लापता हो गई थीं. जिन्हें ढूंढने में वो खुद भी बीमार पड़ गए थे.
राकेश बताते हैं कि 13 जनवरी के देन शांति देवी कहीं निकल जाती हैं. वह मानसिक रुप से परेशान थीं. काफी समय तक इंतजार करने के बाद वह लौटीं नहीं हमने काफी समय तक उनको तलाश किया. कुछ पता नहीं चलने पर पुलिस की मदद ली. ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई. फोटो लेकर कानपुर, लखनऊ, कन्नौज जाकर भी ढूंढा, लेकिन वो कहीं नहीं मिलीं. मैं कई रातों तक सोया नहीं.
पत्नी के बिना जीवन ठहर सा गया, घर लौटने का मन भी नहीं किया. अपने दोस्त के घर चला गया, जहां पहुंचने के बाद आंखों में दिक्कत होने लगी. अस्पताल जाने पर पता चला कि मोतियाबिंद हो गया है. ऑपरेशन कराना पड़ेगा, इसके बाद आंखों का औपरेशन करवा लिया. जब वॉर्ड में शिफ्ट किया गया तो बेड नंबर 20 मिला. ऑपरेशन के अगले दिन जब आंखें खुलीं तो बराबर वाले बेड पर एक महिला की जानी पहचानी आवाज सुनाई दी.
देखा तो बेड नंबर 19 पर मेरी पत्नी थी. नजदीक जाकर देखा तो भरोसा हो गया कि ये मेरी पत्नी ही हैं. उसके सिर पर चोट लगी थी, मुझे पहचान नहीं रही थी. कुछ कहने की स्तिथि में नहीं थी, लेकिन खुशी इस बात की थी की वो मिल गई है. भगवान के आशीर्वाद और किस्मत के साथ से दोबारा पत्नी को ढूंढने वाले राकेश बताते हैं कि जीवन बहुत मुश्किल से कट रहा है.
दरअसल राकेश वेल्डिंग का काम करते हैं, लेकिन आमदनी ज्यादा नहीं है. खाने पीने की भी तंगी रहती है. लेकिन खोई पत्नी के मिलने के बाद राकेश के चेहरे पर अलग ही मुस्कान है. वो कहते हैं कि पत्नी के मिलने के बाद अपने सारे दुख दर्द भूल बैठा हूं. पत्नी अब बोलने भी लगी हैं. राकेश का कहना है कि उन्हें इस बात का बिल्कुल भी भरोसा नहीं था कि पत्नी से इस तरह मुलाकात हो जाएगी.
वहीं डॉक्टर के मुताबिक शांति देवी को सिर पर गंभीर चोट लगी थी. जिस समय उन्हें यहां लाया गया वह कुछ बेहोशी की हालत में थी. इलाज से धीरे-धीरे सुधार हो रहा है. इस खबर को जानने के बाद हर कोई कह रहा है कि जब किस्मत में साथ लिखा है तो किसी ना किसी तरह से मिल ही जाते हैं. वर्ना जिस पत्नी को राकेश ने कई जिलों में ढूंढा फिर भी वो नहीं मिलीं, लेकिन जिस अस्पताल में वो भर्ती थे वहां उन्हीं के बराबर वाले बिस्तर पर वो भी भर्ती हो गईं. ये कुदरत का करिश्मा नहीं तो और क्या है?