नई दिल्ली : शिक्षा मंत्रालय में सचिव पद को लेकर अचानक हुए बदलाव ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल IAS अधिकारी नरेश पाल गंगवलर को लेकर है. दावा किया जा रहा है कि गंगवार को बिना किसी बड़े सार्वजनिक ऐलान के शिक्षा सचिव के पद से हटा दिया गया, जबकि कुछ ही दिन पहले उन्हें इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई थी.
मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि 23 जुलाई को विनीत जोशी की जगह नरेश पाल गंगवार को शिक्षा सचिव बनाया गया था. यानी उस समय सरकार की ओर से उन्हें शिक्षा मंत्रालय की कमान सौंपी गई थी, लेकिन महज कुछ ही दिनों बाद 10 अगस्त को दीप्ति गौर मुखर्जी को नई शिक्षा सचिव नियुक्त कर दिया गया. आधिकारिक तौर पर यह नियुक्ति भी विनीत जोशी के स्थान पर बताई जा रही है.
यहीं से पूरा मामला सवालों के घेरे में आ जाता है. अगर 10 अगस्त को दीप्ति गौर मुखर्जी ने विनीत जोशी की जगह ली, तो फिर 23 जुलाई से शिक्षा सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे नरेश पाल गंगवार का क्या हुआ. क्या उन्हें बीच में ही पद से हटा दिया गया. अगर हां, तो इसकी वजह क्या थी और सरकार ने इस बदलाव को स्पष्ट रूप से क्यों नहीं बताया.
गंगवार पहले भी खीरा सब्सिडी से जुड़े करीब 1.16 करोड़ के विवाद को लेकर सुर्खियों में रहे हैं. आरोप था कि उनके परिवार से जुड़े लोगों को उनके ही विभाग से इतनी बड़ी सब्सिडी मिली. हालांकि, ऐसे मामलों में वास्तविक जिम्मेदारी और नियमों के उल्लंघन का निर्धारण आधिकारिक जांच और दस्तावेजों से ही हो सकता है.
अब शिक्षा सचिव पद पर हुए ताजा बदलाव ने इस पुराने विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है.