पटना: बिहार में सत्तारूढ़ एनडीए के अहम घटक जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने मंगलवार को साफ कह दिया है कि राज्य में लागू शराबबंदी कानून की कोई समीक्षा नहीं होगी. जदयू का यह रुख गठबंधन सहयोगी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी द्वारा शराबबंदी के क्रियान्वयन में खामियों की ओर इशारा करने और गुजरात मॉडल अपनाने की मांग करने के कुछ दिन बाद सामने आया है.
जदयू के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने कहा कि हमारे नेता नीतीश कुमार के कार्यकाल में लागू किए गए शराबबंदी कानून की समीक्षा का कोई सवाल ही नहीं है. इस कानून से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आया है. तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा लागू इस कानून की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की थी.
बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम अप्रैल 2016 में लागू किया गया था. इसके तहत राज्य में शराब के निर्माण, बिक्री और सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध है. जदयू का दावा है कि इस कानून के कारण राज्य के मानव विकास सूचकांक में सुधार हुआ है. इस बीच, राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि शराबबंदी से राज्य के राजकोष को नुकसान हो रहा है. प्रतिबंध हटाने से राजस्व में 14 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है.
रिपोर्ट में अवैध शराब की तस्करी और वैकल्पिक नशीले पदार्थों के सेवन में वृद्धि का भी जिक्र किया गया है. जीतन राम मांझी ने हाल में कहा था कि कानून के क्रियान्वयन में खामियों के कारण नैतिक पतन बढ़ रहा है. उन्होंने मुख्यमंत्री से गुजरात मॉडल लागू करने पर विचार करने का आग्रह किया था. राजद नेता भाई वीरेंद्र ने भी क्रियान्वयन में सुधार की बात कही, लेकिन शराबबंदी के पक्ष में अपना समर्थन दोहराया. जदयू ने साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार के कार्यकाल में बने इस कानून पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा.