अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं... अमेरिकी सांसद की चिंता पर भारत का दो टूक जवाब

Sandeep Kumar Sharma 16 Oct 2026 11:23 AM 1 Mins
अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं... अमेरिकी सांसद की चिंता पर भारत का दो टूक जवाब

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: भारत ने अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की टिप्पणियों पर दो टूक जवाब देते हुए साफ कह दिया है कि वह अपने आंतरिक मामलों में किसी भी तरह की दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं करेगा. भारत के अमेरिका स्थित राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रमिला जयपाल के पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा, “भारत की चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर प्रमिला जयपाल की टिप्पणियां भारत के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य हस्तक्षेप हैं.”

क्वात्रा ने आगे कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां मजबूत, स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएं मौजूद हैं और स्वतंत्र-निष्पक्ष चुनावों का लंबा इतिहास रहा है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर किसी को कोई गलतफहमी है तो भारत रचनात्मक बातचीत के जरिए उसे दूर करने के लिए हमेशा तैयार है.  

प्रमिला जयपाल ने क्या कहा था?

भारतीय मूल की डेमोक्रेटिक सांसद प्रमिला जयपाल ने एक्स पर पोस्ट कर भारत में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया और मतदाता सूची से कथित 13 करोड़ लोगों के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई थी. उन्होंने लिखा, “मैं भारत सरकार द्वारा मतदाता सूची से 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने के कदम से बेहद चिंतित हूं.

यह बिल्कुल वैसा ही हथकंडा मालूम पड़ता है जैसा ट्रंप प्रशासन यहां अमेरिका में लोकतंत्र और वोटिंग अधिकारों को कमजोर करने के लिए अपना रहा है.” जयपाल ने भारत में हो रहे विरोध प्रदर्शनों का भी समर्थन करते हुए कहा कि वे उन लोगों के साथ खड़ी हैं जो लोकतंत्र विरोधी प्रयासों के खिलाफ अहिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं.  

SIR को लेकर क्या है विवाद?

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची को अपडेट करने की एक नियमित प्रक्रिया है. इसके जरिए मृत, डुप्लिकेट या दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं. चुनाव आयोग के अनुसार छूटे हुए योग्य नागरिक फॉर्म-6 के माध्यम से दोबारा अपना नाम जुड़वा सकते हैं. हालांकि विपक्षी दल आरोप लगा रहे हैं कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में यह प्रक्रिया सत्ताधारी दल को चुनावी फायदा पहुंचाने के लिए की जा रही है.

भारत के इस कड़े रुख से साफ है कि वह लोकतंत्र और संप्रभुता के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं करने वाला. राजदूत क्वात्रा के जवाब ने एक बार फिर यह रेखांकित कर दिया कि भारत अपने आंतरिक मामलों में किसी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा.

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