नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जहां अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की है. 28 फरवरी को इस हमले में तेहरान समेत कई महत्वपूर्ण स्थलों को निशाना बनाया गया, जिसमें ईरानी नेतृत्व और सैन्य ठिकाने शामिल थे. इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल के तेल अवीव और अन्य क्षेत्रों पर मिसाइल दागीं, साथ ही खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर भी हमले किए गए. यह संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को प्रभावित कर रहा है.
ईरान में दर्जनों ठिकानों पर हमले हुए हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है. क्षेत्रीय हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है—संयुक्त अरब अमीरात और इज़राइल ने अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है, जबकि कई अन्य देशों में उड़ानें प्रभावित हैं.
भारत की प्रतिक्रिया क्या है?
भारत सरकार ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई है. विदेश मंत्रालय (MEA) ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हो रही घटनाओं से भारत बेहद चिंतित है. मंत्रालय ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे संयम बनाए रखें, स्थिति को और बिगड़ने से रोकें तथा आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें.
बयान में जोर दिया गया है कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए, साथ ही सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए.
नागरिकों के लिए सलाह
भारतीय मिशन क्षेत्र में मौजूद भारतीय नागरिकों से संपर्क में हैं. उन्हें सतर्क रहने, स्थानीय सुरक्षा निर्देशों का पालन करने और मिशन के संपर्क में बने रहने की सलाह दी गई है. कुछ जगहों पर आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं.
यह स्थिति रामजान के महीने में और पहले से ही अस्थिर क्षेत्र में हो रही है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है. भारत ने स्पष्ट रूप से युद्धविराम और बातचीत के माध्यम से समाधान की वकालत की है, ताकि स्थिति और खराब न हो.