Pilibhit conversion case: उत्तर प्रदेश में चादर और फादर के नाम पर किस कदर धर्मांतरण का गंदा धंधा चल रहा था इस बात का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है, अब तक मिली जानकारी के मुताबिक तीन हजार से ज्यादा सिखों को अब तक ईसाई बनाया जा चुका है. इस केस में दक्षिण कोरिया से फंडिंग के कई बातें भी सामने आई हैं. इतना ही नहीं करीब 100 घरों के अंदर से दक्षिण कोरिया के ईयर कलेंडर भी बरामद हुए हैं. इस पूरे रैकेट को नेपाल से कंट्रोल किया जा रहा था.
2002 में शुरू हुआ था धर्मांतरण का खेल
जानकारी के मुताबिक नेपाल सीमा से सटे पीलीभीत के इलाकों में करीब 25 हजार सिख समुदाय से जुड़े लोग रहते हैं. जो इस धर्मांतरण रैकेट के टारगेट थे. स्थानीय गुरूद्वारा प्रबंधन कमेटी के मुखिया गुरदयाल सिंह ने बताया है कि साल 2002 में कुछ विदेशी पादरी टाटरगंज आए थे, जहां उन्होंने 2 लोगों को लालच देकर ईसाई बनाया, और इसके बाद यही लोग इस पूरे सिंडिकेट को चलाने लगे. इन लोगों ने अनेकों लोगों को तरह-तरह के प्रतिलोभन देकर ईसाई बनाया.
चरस तस्कर चला रहा सिंडिकेट!
सूत्रों के अनुसार सबसे पहले सतनाम धर्मांतरण कर ईसाई बना था, पहले ये चरस की तस्करी करता था, बाद में इस रैकेट से मिल कर लोगों का धर्मांतरण कराने लगा. धीरे-धीरे ये अपने इस कुकृत्य में लगा रहा और पहले दर्जनों फिर सैकड़ों और अब तक हजारों लोगों को ईसाई बना चुका है. खबर तो यहां तक है कि ये सतनाम ही पीलीभीत में इस पूरी सिंडिकेट को लीड करता है, इसे ऑर्डर नेपाल में बैठे कुछ पादरियों से मिलते हैं, जिसके बाद सतनाम उसी हिसाब से धर्मांतरण का धंधा चलाता है.
महिला ने दर्ज करया था केस
दरअसल धर्मांतरण केस की पहली FIR एक महिला ने दर्ज कराई थी, इस महिला का नाम मनजीत कौर है, इसने सतनाम, अर्जुन सिंह, बलबंत सिंह, सुमित्रा कौर, और सुरजीत सिंह समेत कुछ और लोगों का नाम भी इस FIR में लिखवाया था, महिला ने आरोप लगाया था कि 12 मई 2025 को इन लोगों ने उसके घर जाकर पैसों का लालाच देकर धर्मांतरण का दवाब बनाया, इस दौरान महिला के पति को 2 लाख रुपये और मकान बनाने का ऑफर भी दिया, बदले में इन लोगों को ईसाई बनना था.
नेपाल से सटे बेल्हा गांव में सबसे ज्यादा केस
धर्मांतरण के सबसे ज्यादा केस नेपाल बॉर्डर से सटे बेल्हा गांव में हैं, यहां के हालात इस कदर तक बिगड़ चुके हैं, कि स्थालीय लोगों ने 9 परिवारों का बहिष्कार तक कर दिया है, इन परिवारों की लिस्ट बनाकर गुरुद्वारे में लगाई गई है, जिसके साथ निर्देश दिये गए हैं कि ये लोग किसी भी धर्म-कर्म की क्रिया में शामिल नहीं होंगे. सिख समुदाय से जुड़े लोगों की मांग है कि जब इन लोगों ने अपना धर्म बदल लिया तो फिर नाम क्यों नहीं बदल रहे, इन्हें अपना नाम भी बदलना होगा, ताकि ये किसी को भी अपनी असली पहचान छिपाकर धोखा ना दे सकें.
एक्शन में आई पुलिस
धर्मांतरण के इस खेल के खिलाफ यूपी प्रशासन ने भी सख्त एक्शन लेना शुरू कर दिया है, अब तक 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की हैं, इसके साथ ही 2 लोगों को नारोटिक्स भेजे गए हैं. पुलिस ने कार्रवाई करते हुआ 10 घरों के बाहर से क्रॉस के निशान भी मिटवा दिये हैं. बताया जा रहा है कि 150 घरों में ईसाई धर्म से जुड़ी गतिविधियां चलती हैं, इन घरों के बाहर क्रॉस बना हुआ था. नेपाल के नजदीक पड़ने वाले भागीरथ और सिंघाड़ा गांव में भी विदेशी पादरियों की अच्छी पैठ है, यहां पर ये लोग मिशनरी का मिशन अच्छी तरह चला रहे थे, बड़ी संख्या में लोगों को ईसाई बना चुके हैं, यहां से नेपाल के कंचनपुर का रिछा चाउन सिर्फ 2 किलोमीटर की दूरी पर है, जहां एक काफी बड़ा चर्च बना हुआ है.