नई दिल्ली: भारत ने एक बार फिर सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर अपना दृढ़ और सख्त रुख दिखाया है. शनिवार को विदेश मंत्रालय ने हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय (PCA) के 15 मई के फैसले को पूरी तरह खारिज कर दिया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि अवैध रूप से गठित तथाकथित कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन (COA) का यह फैसला भारत के लिए बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है.
भारत ने इस न्यायाधिकरण को कभी मान्यता नहीं दी और आगे भी नहीं देगा. जायसवाल ने कहा कि भारत इस तथाकथित फैसले को पूरी तरह खारिज करता है, ठीक उसी तरह जैसे उसने इस अवैध न्यायाधिकरण के पिछले सभी फैसलों को खारिज किया था. उन्होंने जोर देकर कहा कि सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अभी भी पूरी तरह लागू है.
भारत ने मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को एकतरफा रूप से स्थगित कर दिया था. सरकार का कहना है कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह समाप्त किए बिना इस संधि को बहाल नहीं किया जाएगा. भारत का मानना है कि पाकिस्तान ने संधि का दुरुपयोग किया और विवादों को गलत तरीके से मध्यस्थता अदालत में ले गया, जबकि संधि के प्रावधानों के अनुसार मुद्दों का निपटारा तटस्थ विशेषज्ञ या द्विपक्षीय होना चाहिए.
भारत ने बार-बार दोहराया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते. जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक संधि पर कोई चर्चा नहीं होगी. यह फैसला जम्मू-कश्मीर की कुछ जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े विवाद पर आया था, जिसे भारत ने अपनी संप्रभु अधिकारों में दखलंदाजी बताते हुए अस्वीकार कर दिया. अभी देखना होगा कि पाकिस्तान इस करारे झटके के बाद क्या रणनीति अपनाता है.