नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों के संघर्ष को समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के समझौते ने भारत की अर्थव्यवस्था के लिए राहत की नई किरण जगा दी है. तेल-गैस संकट से राहत, गिरते रुपए को सहारा और पश्चिम एशिया में निर्यात में उछाल ये तीन बड़े फायदे भारत को इस डील से मिलने वाले हैं.
दूर होगी तेल की चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा संभालता है. ईरान-ओमान के बीच स्थित यह रूट भारत जैसे बड़े कच्चे तेल आयातक देश के लिए lifeline है. युद्ध के दौरान इस रूट के प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतें फरवरी के 70-72 डॉलर से बढ़कर 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड में करीब 4% की गिरावट आई और कीमत 84 डॉलर के आसपास आ गई. इससे पेट्रोल-डीजल, CNG और LPG की कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है. सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी रोजाना 650 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है, जो अब धीरे-धीरे कम हो सकता है.
रुपए को सहारा, महंगाई पर लगाम
होर्मुज के खुलने से माल ढुलाई लागत और शिपिंग बीमा प्रीमियम घटेगा. जहाजों को केप ऑफ गुड होप का लंबा चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे आयात बिल कम होगा, व्यापार घाटा नियंत्रित रहेगा और रुपए को स्थिरता मिलेगी.
पश्चिम एशिया में निर्यात को नई उड़ान
युद्ध के दौरान भारत का कुल निर्यात प्रभावित हुआ था. मार्च में कुल निर्यात 7.44% घटा, जबकि पश्चिम एशिया को निर्यात 57.95% तक गिर गया. UAE, सऊदी अरब, कतर, ओमान जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ व्यापार ठप पड़ गया था.
शांति समझौते से क्षेत्र में अनिश्चितता खत्म होगी और भारत के इंजीनियरिंग सामान, रसायन, दवाएं, वस्त्र, रत्न-आभूषण और कृषि उत्पादों का निर्यात फिर से तेजी पकड़ेगा.
एक समाचार वेबसाइट को शरद कुमार सराफ बताते हैं, ''इस घोषणा से अनिश्चितता और आर्थिक सुस्ती खत्म होने का रास्ता खुलेगा." एस. सी. FIEO अध्यक्ष राल्हन ने कहा, "भू-राजनीतिक तनाव कम होने से ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होगी, कीमतें नियंत्रित रहेंगी और महंगाई की चिंताएं घटेंगी." 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक हस्ताक्षर होने हैं. यदि समझौता सफलतापूर्वक लागू हुआ तो भारत को न सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा मिलेगी, बल्कि आर्थिक वृद्धि को भी नया बल मिलेगा.
अमेरिका-ईरान डील भारत के लिए सिर्फ एक शांति समझौता नहीं, बल्कि तेल संकट से राहत, रुपए की मजबूती और निर्यात बूस्ट का पैकेज साबित हो सकती है. पूरा देश अब 19 जून और उसके बाद के घटनाक्रम पर नजरें जमाए हुए है.