नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच हो रहे शांति समझौते को लेकर इजरायल ने सख्त रुख अपनाया है. इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कह दिया है कि लेबनान से संबंधित किसी भी शर्त को इजरायल स्वीकार नहीं करेगा और हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा, भले ही इसके लिए अमेरिका से टकराव क्यों न हो जाए.
इजरायली मीडिया 'Ynet' की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अर्जेंट बैठक की मांग की है. G7 समिट के तुरंत बाद यह मुलाकात प्रस्तावित है, जिसमें इजरायल अपनी सुरक्षा चिंताओं को सीधे ट्रंप के सामने रखेगा.
इजरायल की रेड लाइन
इजरायली अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि लेबनान में ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियान चलाने की स्वतंत्रता इजरायल के लिए ‘रेड लाइन’ है. इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा. इजरायल का कहना है कि जब तक उसकी उत्तरी सीमा पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती और हिज्बुल्लाह का खतरा समाप्त नहीं होता, तब तक किसी भी युद्धविराम समझौते का कोई मतलब नहीं है.
सुरक्षा कैबिनेट एकजुट
इजरायल के सुरक्षा कैबिनेट में इस मुद्दे पर पूरी एकजुटता है. नेतन्याहू ने ट्रंप को स्पष्ट संदेश दिया है कि इजरायल इस डील के किसी भी प्रावधान से बंधा नहीं है और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के अनुसार फैसला लेगा.
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और तनाव कम करने के लिए समझौता हो रहा है, जिसे ट्रंप अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत बताना चाहते हैं. लेकिन इजरायल को लगता है कि इस डील में उसकी सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है. अब देखना यह है कि ट्रंप-नेतन्याहू की मुलाकात के बाद मध्य पूर्व की स्थिति क्या होती है. अगर इजरायल ने लेबनान में अपनी कार्रवाई जारी रखी तो ईरान इस समझौते को तोड़ सकता है.