मुंबई/यरुशलम: शिवराज्याभिषेक दिन पर दिल छू लेने वाली खबर सामने आई है. इजराइल अब महाराष्ट्र के गौरव छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने जा रहा है. यह सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि भारत-इजराइल के गहरे ऐतिहासिक संबंधों और माराठा साम्राज्य के साथ बनी इजरायल (यहूदी) समुदाय की अनकही साझेदारी का प्रतीक होगा.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऐलान करते हुए X पर लिखा, ''गौरवशाली और ऐतिहासिक''. इजराइल के मुंबई स्थित महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की और कहा कि महाराष्ट्र सरकार का पूरा सहयोग मिलेगा.
माराठा सेना में बनी इजरायल योद्धा
यह खबर महज सांस्कृतिक आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी मित्रता की याद दिलाती है. भारत में यहूदियों का इतिहास हजारों साल पुराना है. बनी इजरायल समुदाय, जो कोकण तट पर बस गया, 17वीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना और नौसेना का हिस्सा बना. समुदाय की परंपराओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, शिवाजी महाराज ने इनकी सैन्य क्षमता को पहचाना और उन्हें अपनी सेना में शामिल किया.
कई बनी इजरायल सैनिक और नाविक मराठा नौसेना में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे. इतिहासकार अरुणांश बी. गोस्वामी और रेवरेंड जेम्स हेनरी लॉर्ड के लेखन में आरोन चुर्रिकर जैसे नायकों का जिक्र है, जिन्हें मराठा बेड़े में कमांडर नियुक्त किया गया. कुछ बनी इजरायल परिवारों के पूर्वज सिद्दी और अंग्रे नौसेना से मराठाओं में शामिल हुए और कोकण के किलों की कमान संभाली. इन योद्धाओं को बाद में ब्रिटिश भारतीय सेना में भी बड़ी संख्या में जगह मिली. छोटी आबादी के बावजूद वे अधिकारी पदों पर अपनी बहादुरी और अनुशासन के लिए मशहूर हुए.
इजराइल में आज भी भारतीय विरासत
1948 में इजराइल के गठन के बाद हजारों बनी इजरायल परिवार भारत से इजराइल चले गए. आज इजराइल में उनके वंशज 50,000 से अधिक हैं. वे इजराइली समाज, सेना, राजनीति और शिक्षा में सक्रिय योगदान दे रहे हैं. मराठी गीत, भारतीय व्यंजन और परंपराएं आज भी उनके घरों में जीवित हैं.
भारत में मात्र 4-5 हजार बनी इजरायल बचे हैं, मुख्य रूप से मुंबई, ठाणे और कोकण में. उन्होंने हमेशा कहा है कि भारत में उन्हें कभी यहूद-विरोधी उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ा. यही वजह है कि वे भारत को अपना दूसरा घर मानते हैं.
प्रतीकात्मक महत्व क्या है
इजराइली महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने कहा, ''शिवाजी महाराज की प्रतिमा भारत-इजराइल के घनिष्ठ संबंधों का प्रबल प्रतीक बनेगी, खासकर महाराष्ट्र और भारतीय यहूदी समुदाय के ऐतिहासिक संबंधों को देखते हुए.” यह प्रतिमा न सिर्फ शिवाजी महाराज के साहस, स्वराज्य और दूरदर्शी नेतृत्व को सम्मान देगी, बल्कि उन अनगिनत बनी इजरायल योद्धाओं को भी श्रद्धांजलि होगी जिन्होंने माराठा साम्राज्य की नींव रखने में अपना योगदान दिया.