शादी से पहले शारीरिक संबंध चरित्र पर दाग नहीं! सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- "सहमति से रिश्ता रखना कोई अपराध नहीं"

Amanat Ansari 08 Jun 2026 07:19: PM 1 Mins
शादी से पहले शारीरिक संबंध चरित्र पर दाग नहीं! सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा-

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा है कि दो अविवाहित वयस्कों के बीच आपसी सहमति से शारीरिक संबंध बनाना किसी के चरित्र पर काला धब्बा नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने साफ कहा कि ऐसा संबंध किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में प्रतिकूल राय बनाने का आधार नहीं हो सकता.

जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना पुलिस भर्ती मामले की सुनवाई के दौरान की. कोर्ट ने तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती बोर्ड को एक उम्मीदवार की पुलिस कांस्टेबल पद पर नियुक्ति बहाल करने का निर्देश दिया.

मामला क्या था?

इस उम्मीदवार के खिलाफ 2014 में एक महिला के साथ संबंध बनाने और शादी का झांसा देने का आरोप लगा था. दोनों पड़ोसी थे और लगभग 4 साल तक उनके बीच संबंध रहे. बाद में दोनों में समझौता हो गया और 2015 में लोक अदालत में मामले का निपटारा हो गया. इसके बावजूद भर्ती बोर्ड ने इसे नैतिक पतन मानते हुए. उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द कर दी थी,

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

  • दो अविवाहित वयस्कों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध रखना उनके चरित्र पर कोई कलंक नहीं है.
  • ऐसा कोई कानून नहीं है जो दो सहमत वयस्कों को अपनी पसंद का संबंध रखने से रोके.
  • हर प्रेम संबंध शादी में नहीं बदलता. सिर्फ इसलिए कि रिश्ता शादी में नहीं बदला, यह नहीं माना जा सकता कि एक पक्ष ने दूसरे को धोखा दिया.
  • शादी का वादा करके रेप के मामले में लोक अदालत में समझौता होने का मतलब आरोपी द्वारा अपराध कबूल करना नहीं होता.

कोर्ट ने कहा कि जब तक किसी अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक व्यक्ति निर्दोष माना जाता है. साथ ही, समझौते के समय महिला पर कोई दबाव या धमकी का कोई सबूत नहीं मिला. यह फैसला उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जिन्हें असफल प्रेम संबंधों के बाद सामाजिक और नौकरी संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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