नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते और सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट को पार करने वाला पहला बड़ा वाणिज्यिक जहाज भारतीय LNG टैंकर 'दिशा' रहा है. यह टैंकर कतर से 62,000 टन LNG (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) लेकर गुजरात के दहेज पोर्ट की ओर बढ़ रहा है. इसके 18 जून को वहां पहुंचने की संभावना है.
'दिशा' टैंकर ने तीन महीने से ज्यादा समय तक फारस की खाड़ी में रुककर इंतजार किया था. सीजफायर की आधिकारिक घोषणा के बावजूद उसने सामान्य व्यावसायिक मार्ग का इस्तेमाल किया और AIS (ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) चालू रखा.
यह घटना वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया का 20% से ज्यादा तेल और LNG गुजरता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को घोषणा की कि ईरान के साथ शांति समझौता हो गया है और होर्मुज को पूरी तरह खोल दिया जाएगा. ट्रंप ने नाकेबंदी हटाने का भी आदेश दिया.
भारतीय टैंकर 'दिशा' (माल्टा फ्लैग) पेट्रोनेट LNG द्वारा चार्टर्ड है. इसकी सफल यात्रा से न सिर्फ भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बल मिला है, बल्कि दुनिया भर के शिपिंग उद्योग में भी उम्मीद जगी है कि जल्द ही सामान्य यातायात बहाल हो जाएगा. यह घटना भारत की ऊर्जा सुरक्षा और कूटनीतिक महत्व को भी रेखांकित करती है.