नई दिल्ली: औरंगाबाद के नगर थाने के बाहर निगरानी विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दारोगा उमेश राम को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया. यह कार्रवाई उस वक्त हुई, जब दारोगा एक गैस एजेंसी संचालक से रिश्वत की मांग कर रहा था. जानकारी के मुताबिक, राजेश कुमार सिन्हा नाम के एक व्यक्ति ने निगरानी विभाग को शिकायत दी थी कि दारोगा उनकी पत्नी के नाम पर चलने वाली गैस एजेंसी से जुड़े मामले में मदद के बदले रिश्वत मांग रहा है.
मामला बराटपुर के वार्ड नंबर 23 से जुड़ा है, जहां राजेश कुमार सिन्हा अपनी पत्नी सीमा कुमारी के नाम पर एक गैस एजेंसी का सीएसपी केंद्र संचालित करते हैं. इस केंद्र के खिलाफ वार्ड परिषद सदस्य आरती श्रीवास्तव ने अनियमितता का आरोप लगाते हुए अनुमंडल पदाधिकारी के पास शिकायत दर्ज की थी. इसके बाद प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी ने छापेमारी कर 80 गैस सिलेंडर जब्त किए, जिनमें 60 खाली और 20 भरे हुए थे. इस मामले में नगर थाने में केस दर्ज हुआ, जिसकी जांच दारोगा उमेश राम को सौंपी गई थी.
राजेश कुमार के अनुसार, नियमों के तहत उनकी एजेंसी 100 किलोग्राम तक भरा गैस सिलेंडर रख सकती थी, लेकिन दारोगा ने उनकी बातों को अनसुना कर उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया. उमेश राम ने सिलेंडर वापस करने के एवज में 20 हजार रुपए की रिश्वत मांगी. परेशान होकर राजेश ने इसकी शिकायत पटना के निगरानी विभाग से की.
निगरानी विभाग के डीएसपी पवन कुमार और विंध्याचल प्रसाद के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम ने जाल बिछाया और दारोगा को नगर थाने के गेट पर 20 हजार रुपए लेते हुए धर दबोचा. डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि राजेश की पत्नी को इस मामले में जमानत मिल चुकी थी, लेकिन दारोगा लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था. शिकायत की जांच के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया.
बताया जा रहा है कि दारोगा उमेश राम का तबादला नालंदा के लिए हो चुका था और मंगलवार को एसपी ने उन्हें रिलीव भी कर दिया था. इसके बावजूद, उन्होंने अपना चार्ज नहीं सौंपा और रिश्वत लेते हुए निगरानी विभाग के हत्थे चढ़ गए. मामले में आगे की कार्रवाई जारी है.