बुलंदशहर : उत्तर प्रदेश पुलिस के चर्चित आईपीएस अधिकारियों में शामिल कलानिधि नैथानी एक बार फिर सुर्खियों में हैं. बुलंदशहर रेंज के डीआईजी के रूप में तैनात नैथानी ने अपने ही विभाग के छह पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण, रंगदारी, मारपीट, आपराधिक धमकी और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज कराया है.
मामला बुलंदशहर के सिकंदराबाद थाने से जुड़ा है. शिकायतकर्ता सलमान ने डीआईजी को दिए प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि 30 अप्रैल 2026 को सिकंदराबाद पुलिस ने उसे गुलावठी टोल प्लाजा से जबरन उठा लिया. आरोप है कि थाने ले जाकर पुलिसकर्मियों ने उससे 20 लाख रुपये की रंगदारी मांगी. जब उसने रकम देने से इनकार किया तो उसे झूठे एनडीपीएस (NDPS) केस में फंसाने और पैर में गोली मारकर फर्जी एनकाउंटर दिखाने की धमकी दी गई.
शिकायत में यह भी कहा गया कि सलमान और उसके भतीजे के साथ घंटों तक मारपीट की गई. बाद में परिवार पर दबाव बनाकर रात करीब तीन बजे 6 लाख रुपये मंगवाए गए और रकम मिलने के बाद दोनों को छोड़ा गया. शिकायत की जांच के बाद डीआईजी कलानिधि नैथानी ने सिकंदराबाद के तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक नीरज मलिक, उपनिरीक्षक अरुण कुमार, कांस्टेबल योगेश और चार अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया. मामले की विवेचना अब आगे बढ़ाई जा रही है.
कलानिधि नैथानी वर्ष 2010 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं. अपनी सख्त कार्यशैली, निष्पक्ष फैसलों और कानून के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति के लिए उनकी पहचान बनाई जाती है. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उनकी मां हमेशा चाहती थीं कि वह आईपीएस अधिकारी बनें. यही सपना उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बना और उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। वर्ष 2010 में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा के लिए हुआ.