तेहरान: मध्य पूर्व में लगातार तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के युद्धविराम को बढ़ाने का प्रस्तावित समझौता हो गया है. न्यूयॉर्क टाइम्स और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस डील में ईरान को 300 अरब डॉलर (करीब 28.5 लाख करोड़ रुपए) का रीकंस्ट्रक्शन फंड देने और अमेरिकी कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर निवेश का प्रस्ताव शामिल है.
ट्रंप का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों पक्ष परमाणु कार्यक्रम पर सहमति के बेहद करीब पहुंच गए हैं. समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, उसका संवर्धित यूरेनियम नष्ट किया जाएगा. साथ ही अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट में नाकेबंदी हटाएगा और किसी तरह का टोल नहीं लगाएगा.
ईरान का साफ इनकार
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने ट्रंप के दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि परमाणु मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं हो रही है और ड्राफ्ट में संवर्धित यूरेनियम नष्ट करने जैसी कोई शर्त नहीं है. ईरानी संसद के स्पीकर ने भी कहा, ''हम सिर्फ शब्दों पर नहीं, कार्रवाइयों पर भरोसा करते हैं.''
ईरान ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में 24 जहाजों को गुजरने दिया गया. अमेरिका ने ओमान को चेतावनी दी कि अगर ईरान की टोल व्यवस्था का साथ दिया तो सख्त कार्रवाई होगी. इजराइली सेना लितानी नदी पार कर चुकी है. हिजबुल्लाह के रॉकेट लॉन्चर को नष्ट किया गया. UN और WHO ने चेतावनी दी कि लेबनान में गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो रहा है. हर 24 घंटे में औसतन 11 बच्चे हमलों का शिकार हो रहे हैं.
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि जरूरत पड़ी तो ईरान के खिलाफ दोबारा जंग शुरू कर सकते हैं. समझौता अभी ट्रंप की अंतिम मंजूरी का इंतजार कर रहा है. दोनों तरफ से अविश्वास बना हुआ है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम होने की उम्मीद जगी है.