तेहरान: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे तनाव के बीच एक नया बड़ा हमला सामने आया है. ईरानी इस्लामिक आर्मी ने दावा किया है कि उसने दुबई और अबुधाबी में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए हैं, जिनमें 200 से अधिक अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अल मिन्हाद एयरबेस पर हमला किया और दुबई के तटीय इलाके में तैनात अमेरिकी मरीन्स को निशाना बनाया. इसके अलावा दुबई और अबुधाबी में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास, तेल डिपो और रिफाइनरियों को भी निशाना बनाया गया.
दावा किया जा रहा है कि मार्च के पहले पखवाड़े में 400-500 और उसके बाद 600-700 तक अमेरिकी सैनिक हताहत हुए हैं, जबकि 1200-1300 से ज्यादा घायल हुए हैं. यह पिछले 15-20 सालों में अमेरिका के लिए सबसे भारी नुकसान बताया जा रहा है. ईरान का दावा है कि अमेरिकी सैनिक होटलों, आवासीय इलाकों और जहाजों में छिपकर बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें भी टारगेट किया गया. हालांकि अमेरिका की तरफ से अभी तक इस पर कोई बयान नहीं दिया है.
इजरायल पर भी लगातार हमले
उधर इजरायल पर लेबनान से हिजबुल्लाह के हमले, ईरान से सीधे मिसाइल हमले और यमन से हूती विद्रोहियों के हमले हो रहे हैं. हैफा के तेल रिफाइनरी में आग लगने की खबर है. तेल अवीव और हैफा पोर्ट भी प्रभावित हुए हैं. इजरायल में 30-32 दिनों के युद्ध के बाद जनता में भारी असंतोष है. लोग मिस्र की सीमा से भाग रहे हैं और अस्पताल बंकरों, पार्किंग और टेंटों में काम कर रहे हैं.
इजरायली सेना के चीफ ने भर्ती में असफलता और भारी नुकसान की बात कही है. अल जजीरा के हवाले से बताया गया कि पिछले 10-15 दिनों में दुबई और अबुधाबी के शेयर बाजार में 120 बिलियन डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हुआ है. वहीं ईरान का मकसद ट्रंप प्रशासन को मजबूर करके बातचीत की मेज पर लाना है. पाकिस्तान, मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब जैसे देश मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं.