नई दिल्ली: ख़बर है कि प्रभावशाली अधिकारियों का वजूद इतना बढ़ गया हैं कि काम योगी के ख़िलाफ़ होने लगा है! बाराबंकी में जिन छात्रों को पीटा गया उनका किस्सा बेहद चौंका देने वाला है! देखिए तस्वीरों को, ये पुलिसकर्मी कितनी बेरहमी से छात्रों को मार रहा है! यहां कुछ हो रहा है? बीजेपी में कुछ चल रहा है? सत्ता बीजेपी की है, जिनको पीटा गया है वो भी बीजेपी विचारधारा के छात्र हैं! फिर लाठी किसने चलवाई? क्यों चलवाई? यूनिवर्सिटी को किसने बचाया? यूनवर्सिटी का मालिक किसका ख़ास है? अपर्णा यादव का अस्पताल पहुंचना साफ बता रहा हैं कि योगी ने खुद उन्हें भेजकर सही रिपोर्ट मंगवाई!
एक शांतिपूर्ण तरीके से विरोध चल रहा था, बात यहां तक कैसे आई कि दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया? बीजेपी की सरकार है, ये तस्वीरें सिर्फ बाराबंकी की नहीं है, बल्कि ज्यादातर जिलों की है, ये वही मुद्दा है जिसने लोकसभा में बीजेपी को भारी नुकसान पहुंचाया था. पार्टी का झंडा हो या फिर बीजेपी का तमगा पुलिस किसी की नहीं सुनती है, अधिकारी कितने बेलगाम है, ये बिजली विभाग के मंत्री AK शर्मा अच्छे से समझ चुके हैं! अखिलेश यादव भी इन मौकों पर चौका मार देते हैं? बांदा में एक बीजेपी कार्यकर्ता के घर बुलडोज़र चल गया, दो नेता बीजेपी के आपस में भिड़ गए? जानते हैं ऐसा क्यों हो रहा है?
बीजेपी कई खेमे में बंटी पार्टी है, हर अधिकारी को कई लोग हुक्म देने वाले हैं! किसी ने कहा बांदा में गरीब का घर तोड़ दो. किसी ने पूछा क्यों तोड़ा? क्या बाराबंकी वाली ख़बर में भी यही हुआ था? किसी ने कहा पीट दो फिर किसे ने पूछा क्यों पीटा? कार्यकर्ताओं पर लाठी पड़ते ही लखनऊ से दिल्ली तक का सिस्टम हिल गया! बीजेपी में हाहाकार मच गया, योगी आदित्य़नाथ के आदेश पर अस्पताल में अपर्णा यादव से लेकर दोनों डिप्टी सीएम दौरा करने पहुंचे, ज़ख्म पर मरहम लगाने पहुंचे? लेकिन ये क्यों हो रहा है? आख़िर योगी के पीछे ऐसा क्या चल रहा है?
लोग ऐसा आरोप लगा रहे हैं कि उत्तर प्रदेश पुलिस पूरी तरह से बेलगाम है, किसी को भी गिरफ्तार कर रही है, किसी का भी एनकाउंटर किसी को भी पीट रही है, अधिकारी ये सब मैनेज नहीं कर पा रहे हैं? कानून के जानकार कहते हैं कि जब पुलिस की ताकत अपराध को कम करने के लिए जरूरत से ज्यादा बढ़ाई जाती है तो उसका असर जनता पर पड़ता है! थाने-चौकी पर जनता की नहीं सुनी जा रही है? बड़े अपराधियों का एनकाउंटर कर पुलिस वाह वाही लूट रही है लेकिन आम लोग जिनकी कोई पहुंच नहीं है, उनका FIR क्या लिखा जा रहा है?
क्या योगी के आदेश का पालन थाने में हो पा रहा है? योगी महीने में कई बार जनता दरबार लगाते हैं लेकिन पुलिस का अधिकारी किसी आम इंसान से मिलने उसकी बात सुनने में कोई यक़ीन नहीं रखता है! यही कारण है कि जैसे ही पुलिस ने ABVP के छात्रों को पीटा वैसे ही बीजेपी नेता मरहम लेकर दौड़े लेकिन तब तक देर हो चुकी थी! पुलिस की मनमानी कहीं योगी की कुर्सी पर भारी न पड़ जाए, साल 2011-12 की बात है, मायावती के राज में पुलिस ब्राह्मणों पर लगातार FIR करने लगी, नतीजा सत्ता चली गई!
अखिलेश के दौर में पुलिस इतनी लापरवाह हो गई कि प्रदेश का सबसे बड़ा मुद्दा कानून व्यवस्था बन गया, अब योगी के राज़ में पुलिस इतनी बेलगाम हो गई हैं कि जो लोग बीजेपी के लिए वोट मांगते हैं उन्हें ही मारा जाने लगा? जबकि ये छात्र है अपनी मांग रख रहे थे? बात यहां तक पहुंच गई? कई सवाल है जिसका जवाब खुद योगी को खोजना होगा, नहीं तो बहुत देर हो जाएगी! आपको क्या लगता है? क्या थाने-चौकी पर आपकी बात सुनी जाती है? सिंघम बनकर पुलिस वाले अब अपराधियों पर कम आम लोगों पर ज्यादा कानून चला रहे हैं?