Uttarakhand UCC: उत्तराखंड आज एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है, क्योंकि राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो रही है. यह भारत का पहला राज्य होगा जो स्वतंत्रता के बाद UCC लागू करने जा रहा है. इस पहल को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह से तैयार है और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे समाज में समानता और समरसता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आज दोपहर करीब 12:30 बजे इस कानून की औपचारिक घोषणा की जाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उत्तराखंड दौरे से ठीक पहले इस ऐतिहासिक निर्णय का ऐलान होगा. इस अवसर पर राज्य सचिवालय में UCC पोर्टल का भी अनावरण किया जाएगा, जो कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. UCC का उद्देश्य समाज में समानता लाना है, जहां धर्म, जाति, लिंग या समुदाय के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव समाप्त हो सके. इस कानून के तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और व्यक्तिगत मामलों जैसे विवाह, तलाक, संपत्ति के बंटवारे, गोद लेने आदि के लिए एक समान कानून लागू होगा. यह कदम उत्तराखंड में समाज को एक समान आधार पर जोड़ने का प्रयास है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उनकी सरकार ने UCC को लागू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य विधानसभा चुनावों के समय UCC को लागू करने का वादा किया गया था, और अब इस वादे को पूरा किया जा रहा है. उनका मानना है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'सामंजस्यपूर्ण भारत' के दृष्टिकोण को साकार करेगा, जिसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे. हालांकि गोवा में पहले से ही UCC लागू है, लेकिन वहां इसे पुर्तगाली सिविल कोड के तहत लागू किया गया था. उत्तराखंड अब स्वतंत्रता के बाद पहला राज्य होगा, जहां पूरी तरह से समान नागरिक संहिता लागू की जाएगी. यह उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है और राज्य के लिए सामाजिक समानता की दिशा में एक नई शुरुआत का प्रतीक है.
समान नागरिक संहिता के लागू होने से राज्य में शादी और लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को भी रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. इसके तहत नागरिकों को एक समान कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा, चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या समुदाय से संबंधित हों. इस कदम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी के लिए समान नियम और अधिकार हों. UCC के लागू होने से न केवल उत्तराखंड के नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे, बल्कि यह कदम पूरे देश में सामाजिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है. यह कदम भारत के विविधता वाले समाज में एकजुटता और समानता का संदेश देगा और भेदभाव की स्थिति को समाप्त करेगा.
उत्तराखंड में UCC का लागू होना न केवल राज्य के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, बल्कि यह भारत में समानता और समरसता के एक नए अध्याय की शुरुआत भी है. मुख्यमंत्री धामी और राज्य सरकार का यह कदम समाज में समान अधिकारों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगा. UCC के लागू होने से राज्य और देश में सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया जाएगा.