नई दिल्ली: मोकामा से नवनिर्वाचित जदयू विधायक और चर्चित बाहुबली अनंत सिंह को एक बार फिर कोर्ट से झटका लगा है. गुरुवार को पटना की विशेष MP-MLA अदालत ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी.
इसके साथ ही अनंत सिंह को फिलहाल बेऊर सेंट्रल जेल में ही रहना पड़ेगा और निकट भविष्य में उनकी रिहाई की कोई संभावना नजर नहीं आ रही. 75 वर्षीय दुलारचंद यादव की हत्या विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा में हुई थी. वह जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी पियूष प्रियदर्शी के सक्रिय समर्थक थे. घटना के तुरंत बाद मामला गरमाया, विपक्ष ने इसे सुनियोजित चुनावी हिंसा करार दिया. पुलिस ने रात में ही अनंत सिंह को उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था.
उनके साथ मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को भी हिरासत में लिया गया था. तीनों अभी तक न्यायिक हिरासत में हैं. विशेष अदालत ने जमानत अर्जी खारिज करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता और गवाहों पर दबाव बनने की आशंका अभी बरकरार है, इसलिए जमानत देना ठीक नहीं होगा. अनंत सिंह ने चुनाव में भारी मतों से जीत हासिल की थी, लोग उम्मीद कर रहे थे कि विधायक बनने के बाद उन्हें राहत मिल जाएगी, लेकिन कोर्ट ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया.
अनंत सिंह के अधिवक्ताओं ने तुरंत ऐलान किया है कि वे इस आदेश के खिलाफ पटना हाईकोर्ट में अपील दायर करेंगे. अब सभी की नजर हाईकोर्ट की अगली तारीख पर टिकी है. अगर वहां से जमानत मिलती है, तभी अनंत सिंह जेल से बाहर आ पाएंगे. फिलहाल जेल में रहने की वजह से वह विधानसभा सत्र में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हो सकेंगे.
हालांकि संवैधानिक प्रावधान के तहत चुनाव जीतने के बाद छह महीने के अंदर शपथ लेना अनिवार्य है, इसके लिए वे पैरोल या अंतरिम जमानत की अर्जी दे सकते हैं. कुल मिलाकर अनंत सिंह की कानूनी लड़ाई अब ऊपरी अदालतों में जारी रहेगी, और बेऊर जेल के दरवाजे उनके लिए अभी बंद ही रहने वाले हैं.