...ये तस्वीरें हैं चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सबसे फेवरेट कार की, जिसे उन्होंने पीएम मोदी को दिया है, दो दिनों के लिए चीन दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी इसी कार में बैठकर तिनजियांग शहर का दौरा करेंगे, इसकी तस्वीर जैसे ही सामने आई गूगल पर इसकी कीमत, इसका नाम और फीचर सर्च किया जाने लगा, क्योंकि ये कार रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की फेवरेट कार से भी कई गुणा महंगी है.
ये पुतिन की ऑरस सीनेट कार है, जिसे वो अपने साथ लेकर चीन गए हैं, जैसे ही वो एयरपोर्ट पर उतरते हैं, इसी कार में बैठकर रवाना होते हैं, ब्लैक कलर की चमचमाती इस कार की कीमत है करीब 3 करोड़ रुपये, जबकि मोदी को जो कार जिनपिंग ने चीन में घूमने के लिए दी है, उसकी कीमत है 6 लाख 80 हजार डॉलर यानि करीब 6 करोड़ रुपये, इसका नाम है होंगकी L5, ये वो कार है, जिसका इस्तेमाल जिनपिंग ने भारत दौरे के दौरान किया था, जब वो अक्टूबर 2019 में भारत दौरे पर आए थे, चेन्नई के महाबलीपुरम में दोनों नेताओं ने जब मीटिंग की, तो वहां जिनपिंग इसी कार की सवारी कर रहे थे.
कार की खासियत...
पीएम मोदी चूंकि विदेश दौरे पर अपनी कार लेकर नहीं जाते, हिंदुस्तान में वो रेंज रोवर और मर्सिडीज बेंज से चलते हैं, लेकिन विदेश दौरे पर उन्हें अलग-अलग कार मिलती है, पर कहा जाता है ये जो कार जिनपिंग ने मोदी को दी है ये चीन की रॉल्स रॉयस की तरह है, जिसके कई हिस्सों को आरामदायक तरीके से डिजाइन किया गया है. जिसकी चर्चा दुनियाभर में रहती है, ये वीडियो करीब दो साल पुराना है, जिसमें तब के अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को अपनी कार दिखाते हैं, कहते हैं ये द बीस्ट कार है, जो सबसे शानदार है, जिसके बाद जिनपिंग अपनी कार दिखाकर कहते हैं ये है मेरी कार होंगकी L 5, जिसके फीचर जानकर बाइडेन कहते हैं सुपर...पर इस तरीके से जिनपिंग ने अपनी फेवरेट कार किसी को नहीं दी है.
ये कार किसी को चीन बेचता नहीं है, लेकिन बीते दिनों ऐसे दावे भी किए गए थे कि चीन इसका बाजार बढ़ाने के चक्कर में है, और मोदी को ये कार देने के पीछे ये भी प्लानिंग हो सकती है. जिनपिंग ने मोदी के साथ द्विपक्षीय मीटिंग के बाद ये भी संदेश दिया है कि ड्रैगन और हाथी को साथ आने की जरूरत है, जिसका मतलब है चीन भारत में भविष्य देख रहा है, रिश्तों की दूरी को मिटाना चाहता है. पर विदेश मामलों के कई जानकार इस पर चिंता जता रहे हैं, उनका दावा है चीन सिर्फ अपना हित साधना चाहता है. अखिलेश यादव तो ये तक कहते हैं.
चीन अपना माल भारत के बाजारों में भर देगा, उसके बाद मनमाने दाम पर हर चीज सप्लाई करेगा, इससे महंगाई औऱ बेरोजगारी बढ़ेगी. लेकिन कार के नजरिए से देखें तो फिलहाल दुनियाभर के मार्केट में अमेरिका की टेस्ला, फोर्ड, जर्मनी की मर्सिडीज और रॉल्स रॉयस का दबदबा है, ऐसे में चीन ने इस कार का बाजार बढ़ाया तो दुनिया की कई कार कंपनियों को बड़ा कंपटीशन मिल सकता है. यानि मोदी का उधर चीन में भव्य स्वागत होना, जिनपिंग की ओर से मोदी को 6 करोड़ की कार देना क्या इशारा करता है. सोचिए और बताइए.
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